Wednesday, March 10, 2010

मेले में नक्सलियों ने दो को बनाया निशाना

नगर सैनिक की मौत, छात्र गंभीर
जगदलपुर ! बस्तर के उग्रवाद प्रभावित कांकेर जिले के दुर्गकोंदल थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने कल दो व्यक्तियों को गोली मार दी। इस गोलीबारी में घायल एसपीओ की मौत हो गई है जबकि गंभीर रूप से घायल छात्र का ईलाज जारी है।

पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांकेर जिले के दुर्गकोंदल थाना क्षेत्र के कोटुलमुंडा मेला में लगाये गए पान की दुकान पर कल एसपीओ कंवरलाल नरेटी अपने गांव के छात्र सूरजलाल के साथ खड़े हुए थे। इसी बीच वहां कुछ नक्सली पहुंचे और उन दोनों पर गोलियां दागनी प्रारंभ कर दी। इस गोली बारी के बाद पूरे मेला क्षेत्र में भगदगड़ मच गई। गंभीर रूप से घायल एसपीओ कंवरलाल नरेटी की अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई जबकि 11वीं के छात्र सूरजलाल को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्र सूरजलाल की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि गत् माह 25 फरवरी के बाद नक्सलियों द्वारा की गई हिंसक वारदात की यह पहली कार्यवाही है। दूसरे शब्दों में कांकेर जिले में माओवादियों के विरूध्द जारी ऑपरेशन ग्रीनहंट के बाद माओवादियों द्वारा की गई यह सबसे बड़ी वारदात है। यहां यह भी उल्लेख करना लाजिमी होगा कि दुर्गकोंदल के दमकशा क्षेत्र का कोटुलमुंडा मेला अंचल का सबसे लोकप्रिय मेला है जिसमें हजारों की तादाद में आदिवासी शामिल होने के लिये दूर-दूर से आते है।

इधर कांकेर जिले के बड़गांव थाना क्षेत्र में माओवादियों द्वारा अगवा किये गए दो ग्रामीण सकुशल अपने गांव लौट आये है। पुलिस ने इस पूरे मामल की छानबीन प्रारंभ कर दी है। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत् वर्ष दिसंबर माह में बड़गांव निवासी धरमुराम दुग्गा एवं गणेशराम दुग्गा का माओवादियों ने अपरहण कर लिया था। लगभग तीन माह तक अपने साथ रखने के बाद माओवादियों ने इन दोनो व्यक्तियों को जंगल से रिहा कर दिया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।


कांकेर ! भानुप्रतापपुर तहसील अंतर्गत ग्राम घोटूलमुण्डा मेले के एक पान की दुकान में खड़े एक नव आरक्षक तथा नगर सैनिक पर 20 से 25 नक्सलियों के एक दल ने भरमार बंदुक से गोली मारकर बुरी तरह से घायल कर दिया। नव आरक्षक जान बचाकर भाग गया जिसमें नगर सैनिक सहित एक छात्र घायल हो गया दोनो घायलों को गंभीर हालत में भानुप्रतापपुर अस्पताल लाया गया है जहां उनका उपचार जारी है लेकिन हालत चिंताजनक बनी हुई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दमकसा से सटे ग्राम घोटूलमुंडा के मेले में एक पान की दुकान में खड़े एक नवआरक्षक बीरेश कोड़ोपी तथा नगर सैनिक कुंवरलाल सिंह तथा एक छात्र सुरेश जैन पर शाम को लगभग पांच बजे नक्सलियों भरमार बंदुक से तबाडतोड़ गोली चलाकर हत्या का प्रयास किया,आरक्षक बीरेश वहां से जान बचाकर भाग गया लेकिन न0सै0कुंवरसिंह के पीठ में 9 छर्रे तथा छात्र सुरेश जैन के पीठ में एक गोली लगी है। घटना के बाद मेले में भागमभाग की स्थित निर्मित हो गई तथा पूरा मेला क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। सुरक्षा के लिए लगाये जवानों ने नक्सलियों से मुकाबला कर दोनो घायलों को भानुप्रतापपुर अस्पताल पहुंचाया है जहां दोनो घायलों की हालत च्ािंता जनक बताई जा रही है। पुलिस ने अज्ञात नक्सलियों के खिलाफ मामला दर्ज कर मौके पर छानबीन कर रही है। समाचा लिखे जाने तक मिली जानकारी के अनुसार दोनो घायलों को बेहत्तर ईलाज के लिए रायपुर रिफर किया जा रहा है।


एसपीओ बने पुलिस विभाग के बंधुवा

जगदलपुर ! बस्तर में सक्रिय वामपंथी उग्रवादियों से लड़ने के लिये पुलिस बल के सहायक के रूप में भर्ती किये गए विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की स्थिति पुलिस विभाग में बधुवा मजदूरों जैसी हो गई है। पुलिस थाने में झाड़ू-पोछा कराने से लेकर घरेलू काम-काज तक एसपीओ के जवानों से कराया जा रहा है।

बीजापुर जिले के भैरमगढ़ थाना क्षेत्र में 234 एसपीओ के जवान भर्ती किये गए है। पुलिस बल की कमी को देखते हुए इन जवानो के माध्यम से माओवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने की योजना बनाई गई थी। फलस्वरूप भैरमगढ़ के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम बस्तर के अधिकांश पुलिस थानों में बड़ी संख्या में एसपीओ के जवान तैनात किये गए है। पुलिस विभाग की जानकारी के अनुसार इन जवानों की कुल संख्या 3 हजार से यादा आंकी गई है। भैरमगढ़ में पदस्थ एक एसपीओ की माने तो विभिन्न थानों में पदस्थ इन जांबाज जवानों की स्थिति बंधुवा मजदूर जैसी हो गई है। अपना नाम नहीं प्रकाशित किये जाने की शर्त पर इस एसपीओ ने बताया कि महिला एसपीओ द्वारा पुलिस थानों में झाड़ू-पोंछा करवाया जा रहा है और खाली समय में पुरूष एसपीओ से अन्य घरेलू काम करवाये जा रहे है। वैसे झाड़ू-पोंछा करने के अलावा एसपीओ नेताओ के घरों की सुरक्षा भी कर रहे है। उदाहरण के लिये भैरमगढ़ निवासी संसदीय सचिव महेश गागड़ा के पुस्तैनी मकान और आवास की रक्षा एसपीओ कर रहे है। श्री गागड़ा के अलावा कांग्रेसी नेता अजय सिंह के सुरक्षा के लिये भी एसपीओ के जवान तैनात किये गए है। अधिकांश एसपीओ की शिकायत है कि पुलिस विभाग द्वारा उन्हें वेतन के रूप में 2130 रूपयें उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन एक दिन की गैरहाजरी हुई तो दो दिन का वेतन अधिकारियों द्वारा काट लिया जाता है। भैरमगढ़ के थाना प्रभारी से उक्त संबंध में जब जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि एसपीओ के अनुपस्थित होने का वेतन वे लोग नहीं काटते है।

वे तो केवल गोसवारा बनाकर भेज देते है। गोसवारा पास करने का कार्य जिला पुलिस कार्यालय से किया जाता है। एक-एक दिन की छुट्टी के लिये मोहताज इन एसपीओ की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। 24 घंटे उनका समय थाना और उसके आस-पास कट रहा है। पुलिस का साथ देने के कारण वे माओवादियों के हिट लिस्ट में आ चुके है। इसलिये मौत के डर से अब वे अपने गांव भी नहीं लौटना चाहते।

नक्सली पेच का नया काट

छत्तीसगढ़ में क्सली मसले का समाधान, दिनोंदिन बदले हालात को देखते हुए पेचीदा होता जा रहा है। हाल ही में, नक्सलियों की ओर से संघर्ष विराम के तहत समझौते को दिशा देने की कोशिश की गई। लेकिन, नक्सलियों की इस पहल में सशर्त पेच होने के कारण केंद्र सरकार ने उक्त पहल को नकार दिया। इसके बाद माओवादियों के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं ने हालात को फिर पेचीदा बनाते हुए अपनी ओर से एक नई पहल ईजाद की या तो सरकार बातचीत पर पहल करे या बड़े संघर्ष के लिए तैयार हो जाए। कुल मिलाकर हालात को घुमावदार बनाने का यह सिलसिला नक्सलियों की लंबी सूझबूझ का ही प्रतीक मालूम पड़ता है। इनके इस पहल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित राज्यों में चल रहे संयुक्त अभियान को दिशा देने के लिए स्पेशल ऑपरेशन ग्रु्रप (एसओजी) के गठन की तैयारी का मंसूबा बनाया है। इस मंसूबे के बूते संयुक्त अभियान को नई रणनीति के तहत दिशा देने की पहल भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि नक्सल प्रभावित राज्यों में पुलिस और सुरक्षाबलों के मध्य तालमेल की जिम्मेदारी भी एसओजी के गठन पर निर्भर करेगी। नक्सलियों के निरंतर बदलते रणनीतियों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सहित नक्सल प्रभावित आठ राज्यों को पत्र भेजकर स्पेशल ऑपरेशन गु्रप की कारगर भूमिका पर राय मॉंगी है। गृहविभाग के मुताबिक नक्सल प्रभावित राज्यों में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान की पूरी कमान भी एसओजी के सुपुर्द रहेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने माकूल विवेचना के तहत अर्धसैन्य बलों के आला अफसरों के साथ राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को समन्वित करते हुए, इस मसले के स्वरूप को विस्तार देने का मन बनाया है। दरअसल, स्पेशल ऑपरेशन गु्रप के गठन की महत्वपूर्ण पहल इसलिए भी लाजिमी है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जहाँ विकास कार्यों की प्राथमिकता बाधित हो चली है। ऐसे क्षेत्रों को विकास के जनजीवन से जोड़ते हुए एसओजी जैसे इकाई की जरूरत महत्वपूर्ण जान पड़ती है। चूँकि, जब तक आदिवासी क्षेत्रों के उन इलाकों को नक्सली कब्जों से मुक्त नहीं कराया जाएगा, तब तक विकास की किसी कसौटी में हम खरे नहीं उतरेंगे। ऐसी दशा-दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन समस्त राज्यों में सूचनाओं का तालमेल बनाए जाने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना है तथा इन्हें सक्रियता प्रदान करने के लिए एसओजी की कारगर भूमिका को प्रभावी बताया है। इस तरह नक्सलियों से लड़ने के लिए एक नई टीम का आह्वान गृह मंत्रालय की ओर से किया गया बेहतर आह्वान है और इस दिशा में सक्रियता बनाए रखना चाहिए।
(संपादकीय, नई दुनिया, रायपुर, १० मार्च, २०१०)

Monday, March 8, 2010

ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू, सीमा सील

मिदनापुर. 07 मार्च. पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले में माओवादियो की घुसपैठ रोकने के लिए उडीसा से लगती उसकी सीमा पर कल रात से ही संयुक्त सुरक्षा बलों की कई टुकडियां तैनात करके ऑपरेशन ग्रीन हंट की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज बताया कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के तहत पूरी सीमा को सील कर दिया जायेगा ताकि उडीसा की तरफ से इस जिले में कोई घुसपैठ नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि माओवादी इसी सीमा से उड़ीसा से पश्चिमी मिदनापुर जिले में घुसपैठ करते हैं। इस बीच, पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक एम.के. वर्मा ने बताया कि लालगढ पुलिस स्टेशन के तहत मोहुलबोनी गांव में कल रात संयुक्त बलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी हुई। उन्होंने बताया कि इस घटना के हताहतों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

कृषि मंत्री के नक्सली संबंधों पर स्थगन अग्राह्य

रायपुर। 08 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों द्वारा कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के नक्सलियों से संबंधों को लेकर किए गए स्थगन प्रस्ताव को अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने अग्राह्य कर दिया। अध्यक्ष ने इसे स्थगन का विषय ही नहीं माना। इस चर्चा के दौरान कृषि मंत्री श्री साहू स्वयं पूरे समय सदन में मौजूद थे। कांग्रेस के श्री नंदकुमार पटेल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूरा प्रदेश, कृषि मंत्री के नक्सलियों से संबंध होने की सच्चाई जानना चाहता है। हमने इस विषय पर काम रोको प्रस्ताव की सूचना दी है। इसे ग्राह्य कर चर्चा कराएं तो और भी कई तथ्य सामने रखे जा सकेंगे।

श्री पटेल ने कहा कि यदि कृषि मंत्री के संबंध में प्राप्त जानकारी में सच्चाई है तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा न करते हुए मुख्यमंत्री ने बिना जांच के ही तथ्यहीन ठहरा दिया है। चर्चा कर विपक्ष मुख्यमंत्री के कथनों को असत्य साबित करेगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण से सरकार कटघरे में है। कृषि मंत्री को बताना होगा कि उनके प्रफुल्ल झा से क्या संबंध हैं, उनकी मुलाकातें कब-कब हुईं? श्री पटेल ने श्री साहू पर कार्रवाई न किए जाने को जनसुरक्षा का उल्लंघन भी बताया। इस पर हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्यमंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह स्थगन सूचना का विषय नहीं है। तो अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि श्री पटेल शून्यकाल में अपनी बात रख रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे ने संसदीय कार्य मंत्री की आपत्ति पर अध्यक्ष से व्यवस्था का आग्रह करते हुए कहा कि इस प्रदेश में नक्सल गतिविधियों से निपटने एक ओर सरकार प्रयास करने की बात कहती है और दूसरी ओर सरकार के ही नुमाइंदों के संबंध नक्सलियों से है। श्री चौबे ने कृषि मंत्री साहू और प्रफुल्ल झा द्वारा लिखित दो अलग-अलग पुस्तकों की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि ये किताबें वर्ष 2001 2008 में प्रकाशित की गयीं। दोनों में ही लेखक के रूप में श्री साहू व श्री झा के आलेख प्रकाशित हुए हैं। श्री साहू द्वारा पुस्तक 2008 में प्रकाशित की गयी जबकि प्रफुल्ल झा व उसके पुत्र प्रतीक झा की गिरफ्तारी 2006-07 में हुई थी। इससे उनके आपसी संबंध स्पष्ट होते हैं। श्री चौबे ने कहा कि विपक्ष ऐसे ही कई तथ्यों को स्थगन पर चर्चा के दौरान उजागर करना चाहता है। इसलिए प्रस्ताव को ग्राह्य किया जाना चाहिए। जिसका संसदीय कार्यमंत्री श्री अग्रवाल ने पुन: विरोध किया। इस पर अध्यक्ष श्री कौशिक ने व्यवस्था दी कि यह विषय स्थगन प्रस्ताव का नहीं है अतएव सूचना को अग्राह्य कर दिया गया है। इस पर पुनर्विचार की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष चौबे ने कहा कि पुस्तकों में नक्सली साहित्य का भान होता है इसलिए चर्चा कराने की जरूरत है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के विधायक बंटे हुए नजर आए।

कृषि मंत्री साहू के सदन में प्रवेश करते ही शिव डहरिया ने चुटकी ली कि क्या गढ़चिरौली से आ रहे हैं। जवाब में श्री साहू ने कहा- नहीं छत्तीसगढ़ से। यह सुनकर जोगी ने कहा बेचारे को फंसा रहे हों। सीधा छत्तीसगढ़िया है। यह सुनते ही कांग्रेस के अन्य विधायकों के हाव-भाव बूझे-बूझे से रहे।

Sunday, March 7, 2010

नक्सलियों की सोच विकास विरोधी

दुधावा चौकी अंतर्गत ग्राम कोटल भट्टी में आयोजित कम्युनिटी पुलिसिंग शिविर को संबोधित करते एसपी अजय यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का समुचित वातावरण बनाने के लिए सरकार अधिक से अधिक संसाधन उपलब्ध कराना चाहती है। इसके लिए जरूरी है कि ग्रामीण भी सहयोग करें। पुलिस अपने स्तर पर ग्रामीणों को सहयोग करने तत्पर है। नक्सलियों की क्रूरतम कार्यशैली और विकास के प्रति नकारात्मक सोच अब जग जाहिर हो चुकी है। जनता के समक्ष पुलिस की सकारात्मक विकास वाली कार्यशैली स्पष्ट हो चुकी है। जनता स्वयं तय करे कि अब वे पुलिस का साथ देकर विकास चाहते है या नक्सलियों का साथ देकर विनाश। एएसपी बालाजी राव ने कहा कि नक्सली ग्रामीणों को पुलिस के विषय में मिथ्या एवं भ्रामक जानकारी देते है। पुलिस और जनता के मध्य दुरी बनाकर अपना स्वार्थ सिध्द करते है। नक्सलियों का रास्ता गलत है तथा इस मार्ग पर चलकर किसी का भला नहीं हो सकता है। बच्चों एवं युवाओं को खुशहाल भविष्य के लिए सरकार एवं पुलिस का साथ देेने कहा। शिविर में कोटलभट्टी के अलावा मुसुरपुट्टा, बासनवाही, सांईमुंडा आदि के ग्रामीणों ने भी भाग लिया। शिविर में उपस्थित डाक्टरों ने ग्रामीणोंं का स्वास्थ परीक्षण किया तथा दवाईयां वितरित की।

महिलाओं के लिए रस्सी कूद, मटकाफोड़, बच्चों के लिए कुर्सी दौड़ एवं विवाहित जोड़ों के लिए सुई धारा प्रतियोगिता अयोजित की गई। बालिका कुर्सी दौड़ में प्रथम रही नीरजा, द्वितीय सरोज, तृतीय दीनेश्वरी, महिला कुर्सी दौड़ में प्रथम मीलो बाई, द्वितीय लली मरकाम, तृतीय सुशीला बाई, मटकाफोड़ में प्रथम गोदिया बाई, द्वितीय लली मरकाम, तृतीय संतोष्ी बाई रहे। सुई धागा प्रतियोगिता में प्रथम सुखचंद-राजबाई, द्वितीय राजेलाल- मानोबाई, तृतीय सियाराम - रमशीला रहे। सभी विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। पुलिस विभाग ने ग्राम मुसुरपुट्टा और बासनवाही के सरपंच को खेल सामग्री प्रदान की। शिविर में एसडीओपी ज्योति सिंह, डीएसपी मिर्जा जियारत बेग, थाना प्रभारी नरहरपुर अंजु चेलक, चौंकी प्रभारी दुधावा आरपी सिन्हा भी उपस्थित थे। शिविर को सफल बनाने में डा. विनोद, डा मरकाम, सरपंच रेश्मा नेताम, के अलावा चंद्रभान साहू, बिहारीलाल सलाम, फूल सिंह नेताम, नकुल निषाद, कनक कश्यप, विरेंद्र नेताम, माखन लाला मरकाम आदि का योगदान रहा।

नक्सली इलाकों में होंगे नर्सिग कालेज

जगदलपुर. स्थानीय टाऊन हॉल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में बीएससी नर्सिंग प्रथम वर्ष की छात्राओं ने आजीवन मानव सेवा की शपथ ली। शासकीय नसिर्ंग महाविद्यालय के प्रथम बैच की छात्राओं को महारानी हास्पिटल की नर्सिग सुपरिंटेडेंट टी माइकल ने शपथ दिला उन्हें शुभकामना दी और कहा कि नर्स में सेवा भावना का होना अनिवार्य है।



डीएमई डा.एसएल आदिले ने कहा कि नर्स की समाज में प्रमुख भूमिका है। 24 घंटे मरीजों को सेवा देने वाली नर्स समाज के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। नक्सलवाद से प्रभावित जिलों में और भी नर्सिग की कक्षाएं खोली जाएंगी जिससे उस क्षेत्र के लोग लाभान्वित हो सकें। संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा एवं रजिस्ट्रार छग आयुष विज्ञान डा.एके भोइटे ने द्वीप प्रज्वलन का अर्थ शपथ लेने से बताया। इसका मतलब है आजीवन उस कार्य के प्रति समर्पण। समाज इसके बिना अपंग है। कार्यक्रम डायरेक्टर डा.एस बोस ने अंग्रेजी शब्द नर्स को परिभाषित करते हुए कहा कि नर्स में पांच अलग-अलग अर्थ सामने आते हैं, विनम्रता,समझदारी, जिम्मेदारी, सहानुभूति व तौर तरीके। एक नर्स में इन गुणों का होना अनिवार्य है।



नर्सिग महाविद्यालय जगदलपुर की प्राचार्य बसन्ती चक्रवर्ती ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रारंभ किए गए शासकीय नर्सिग महाविद्यालय के स्थापित होने से लाभान्वित हो रही है। जिससे छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाकर कार्य कर सकेंगी। यह एक बहुमूल्य अवसर बस्तर विकास के लिए इन छात्राओं को प्राप्त हुआ है।

चार नक्सली गिरफ्तार

कोरबा। छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले के कुनकुरी थाना पुलिस ने चार नक्सलियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नक्सली पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब रहा।

पुलिस पकड़े गए नक्सलियों से पूछताछ कर रही है, ये नक्सली मंगला नगोसिया गिरोह के हैं।

जशपुर जिले के पुलिस अधीक्षक सुशील चंद्र द्विवेदी ने बताया कि बुधवार की रात यह मुखबिर से सूचना मिली कि फरसा टोला के पास जंगल में पांच नक्सली किसी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सूचना के मुताबिक पुलिस ने जंगल में घेराबंदी की और चार नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि एक अन्य भागने में कामयाब रहा।

माओवादी धमकी के बाद सुरक्षा कड़ी

कोलकाता। माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशन जी की महानगर को उड़ाने की धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है। रविवार को कोलकाता पुलिस आयुक्त गौतम मोहन चक्रवर्ती ने आला अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में हमले के लिहाज से हर कमजोर कड़ी पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुंबई पर आतंकी हमले की तरह जलमार्ग से महानगर में माओवादियों के प्रवेश की आशंका जतायी गयी। उसके बाद महानगर को आने वाली रेल मार्ग, सड़क और जल मार्ग पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया है कि खास कर रात के वक्त सुरक्षा और बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही महानगर से सटे जिलों के पुलिस को भी सतर्क किया गया है। हालांकि फिलहाल सुरक्षा बढ़ाये जाने को लेकर पुलिस अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। महानगर के जिन इलाकों में नक्सलियों का आनाजाना रहा है वैसे क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष नक्सली नेता तेलुगू दीपक महानगर से सटे बेहला क्षेत्र के सरसुना बस स्टैंड के निकट से सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। उसके बाद नक्सली नेता किशनजी ने सरकार को वार्ता का प्रस्ताव दिया था। साथ ही दीपक की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी। केंद्र या राज्य सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद नक्सली नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने अल्टीमेटम दिया कि यदि सरकार वार्ता के लिए घोषणा नहीं करती है तो इस बार माओवादियों के निशाने पर कोलकाता व भुवनेश्वर शहर होंगे।

किशनजी के दावे पर पिल्लै का जुबानी प्रहार


नई दिल्ली । केंद्र सरकार व माओवादियों के बीच वाकयुद्ध जारी है। शनिवार रात माओवादी नेता किशनजी द्वारा दिए गए बयान के जवाब में गृह सचिव जीके पिल्लै ने रविवार को कहा माओवादी यह स्वप्न देखते रहें, लोकतंत्र में सपना देखने का अधिकार सभी को है। उन्होंने दोहराया कि बिना हिंसा छोड़े बातचीत नहीं हो सकती।

विदित हो कि किशनजी ने कहा था कि हम 2050 से बहुत पहले ही भारत सरकार का तख्ता पलट देंगे। जानकारों की मानें तो देश को खोखला कर अपनी जुड़े जमाने की माओवादियों की सुनियोजित रणनीति को लेकर जो अंदेशा जताया जाता रहा है, किशनजी के बयान से उसकी पुष्टि होती है। आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञों ने लगातार आगाह किया है कि बंदूक और बुद्धिजीवियों के सहारे सत्ता स्थापित करने का लक्ष्य माओवादियों के दिमाग में है। यही वजह है कि सूबों की राजनीति में भी उनका गहरा दखल होता जा रहा है।

माओवादियों की सियासत में घुसपैठ का पश्चिम बंगाल सबसे ठोस प्रमाण माना जा रहा है। शायद यही वजह है कि केंद्र सरकार ने माओवादियों को देश के लिए सबसे गंभीर खतरा करार दिया है।

बस्तर अंचल में महिलाओं से हथियार डालने का अनुरोध

जगदलपुर. 07 मार्च. नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में जनप्रतिनिधियों ने महिला नक्सलियों से हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा से जुडने का अनुरोध किया है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का जिक्र करते हुए बस्तर जिला पंचायत की पूर्व उपाध्यक्ष और आदिवासी नेता शांति सलाम ने भटकी हुई महिलाओं से हथियार डालकर इस अंचल के विकास में सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बंदूक थामकर इस अंचल का विकास नहीं विनाश ही हो सकता है। बस्तर पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. सती ने भी कहा कि इस अंचल के विकास में आदिवासी महिलाओं का बहुत योगदान है। इसलिए उन्हें नक्सलियों का साथ देना बंद करना चाहिए। इसी में इस अंचल के आदिवासियों का हित है। पुलिस सूत्रों ने स्वीकार किया कि इस अंचल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर माओवादी नक्सली संगठनों द्वारा एक सप्ताह तक अनेक कार्यक्रम आयोजित करने की सूचनाएं मिली हैं। इस सिलसिले में नक्सलियों ने अनेक बैठकें भी की हैं। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय आदिवासी महिलाओं को नक्सली संगठन में भर्ती कर उन्हें बंदूक और अन्य आधुनिक हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके मद्देनजर पुलिस ने पांच सौ से अधिक स्थानीय महिलाओं को निश्चित मानदेय पर विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में भर्ती किया है। पुलिस का कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान बीस से अधिक महिला नक्सली मुठभेड में मारी गयी हैं। पुलिस को समय-समय पर अनेक आदिवासी महिलाओं के नक्सलियों से जुडने की खबरें भी मिलती हैं।

पं बंगाल में ग्रीन हंट शुरू

मिदनापुर. 07 मार्च. पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले में माओवादियो की घुसपैठ रोकने के लिए उडीसा से लगती उसकी सीमा पर कल रात से ही संयुक्त सुरक्षा बलों की कई टुकडियां तैनात करके ऑपरेशन ग्रीन हंट की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज बताया कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के तहत पूरी सीमा को सील कर दिया जायेगा ताकि उडीसा की तरफ से इस जिले में कोई घुसपैठ नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि माओवादी इसी सीमा से उड़ीसा से पश्चिमी मिदनापुर जिले में घुसपैठ करते हैं। इस बीच, पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक एम.के. वर्मा ने बताया कि लालगढ पुलिस स्टेशन के तहत मोहुलबोनी गांव में कल रात संयुक्त बलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी हुई। उन्होंने बताया कि इस घटना के हताहतों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

सरकार वार्ता करे नहीं तो हमला

माओवादी नेता किशनजी की धमकी
नई दिल्ली । माओवादियों ने धमकी दी है कि सरकार बातचीत की टेबल पर आए वरना नक्सली हमले के लिए तैयार रहे। माओवादियों के नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने केंद्र सरकार से जल्द बातचीत करने को कहा है और अगर ऐसा नहीं होता है तो माओवादियों का अगला निशाना कोलकाता और भुवनेश्वर जैसे ब़ड़े शहर हो सकते हैं। किशनजी का ये बयान पश्चिम बंगाल और उ़ड़ीसा में माओवादियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बाद आया है।


हालांकि किशनजी ने झारखंड के मुख्यमंत्री के बारे में कहा है कि सोरेन आदिवासी परिवार से हैं लिहाजा वे उनकी समस्याओं को समझते हैं। अगर वे हमारे विरुद्ध कोई काम करते हैं तो हम उनसे भी मुकाबला करेंगे। किशनजी ने ये बातें एक बांग्ला चैनल को दिए इंटरव्यू में कही हैं। साथ ही किशनजी ने कहा है कि केंद्र सरकार और माओवादियों के बीच होने वाली बातचीत में लेखिका अरुंधति राय और तृणमूल कांग्रेस के नेता कबीर सुमन मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं। केंद्र सरकार को बातचीत के लिए माओवादियों के खिलाफ चल रहे ज्वाइंट ऑपरेशन को बंद करना होगा और प्रधानमंत्री को ज्वाइंट ऑपरेशन को रोकने की घोषणा करनी होगी।

हमें भारतीय संविधान पर गर्व है

डॉ इंदिरा मिश्र
वरिष्ठ लेखिका एवं सेवानिवृत अ मुख्य सचिव
छत्तीसगढ़

भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को भारत की जनता ने अपने आप को सौंपा था। इस संविधान में कुल 395 धाराएं, 12 अनुसूचियां तथा 3 परिशिष्ट हैं और यह विश्व के सबसे बड़े संविधान में आता है।


यह एक ऐसी विलक्षण पुस्तक है, जिसके माध्यम से हमने अपने समाज को एक प्रशासनिक ढांचा सौंपा है, तथा एक दो को छोड़कर जीवन के हर पहलू को वह ढांचा प्रभावित करता है। यहां रहने तथा आने वाले को भारतीय संविधान के अनुरूप अपने को चलाना होगा।

यह कहना अतिश्योक्तिनहीं होगी, कि भारतीय संविधान में वेदों का ज्ञान, भारतीय संवेदना की कोमलता एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की व्यापक धारणा, अंग्रेज की तर्कसम्मत व्यवस्था, फ्रांस की मानवता, भाईचारे की भावना व स्वतंत्रता, अमरीका की न्यायप्रियता एवं संतुलन सभी का अर्क समाहित है।

इन दिनों एक सम्मानीय फिल्मी हस्ती (गुलजार) यह कहते हुए टीवी पर दिखाई देते हैं, कि हमें अपने संविधान पर गर्व है। हो भी क्यों नहीं? आखिर इस संविधान ने पिछले 60 वर्षों से हमारे देश को आगे बढ़ाया है, हरेक नागरिक को बराबरी का दर्जा दिया है, गरिमा दी है, अभिव्यक्ति का अधिकार व आजादी ही नहीं, बल्कि महिलाओें तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए विशेष सम्मान व स्थान दिया है। अब यदि हमें सचमुच में अपने संविधान पर गर्व है, तो हमें हृदय से, तन-मन-धन से इसका पोषण करना होगा, अन्यथा यह पुस्तकालयों में सजी एक लम्बी चौड़ी पुस्तक बनकर रह जाएगा। इस शुरुआत को करने के लिए उन पर अधिक भरोसा किया जाना चाहिए, जो इस संविधान की बदौलत, सबके बराबर होते हुए भी सबसे ऊंचे हैं (ऑल आर इक्वल बट सम आर मोर इक्वल दैन अदर्स) अर्थात देश के उच्च पदस्थ राजनेता, मुख्य मंत्रीगण, मंत्रिपरिषद के सदस्य, प्रधानमंत्री, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य न्यायाधीश, प्रशासनिक पदाधिकारी तथा धनाढय व्यक्ति। चूंकि उनके एक वाक्य का अनेकों पर प्रभाव पड़ता है। पूरा स्थानीय माहौल बनता या बिगड़ता है।

हमारे अघोषित कर्तव्य
जाहिर बात है कि जब तक हमारी कथनी और करनी एक नहीं होगी, तब तक लोगों को हमारी नसीहत स्वीकार नहीं होगी। साथ ही, हम अपने अधिकारों को लेकर जितने सजग हैं अपने कर्तव्यों को लेकर भी उतने ही सजग होने चाहिए। कर्तव्य भी संविधान का उतना ही भाग है। अधिकतर लोग अपने मौलिक अधिकारों का तो ज्ञान रखते हैं, परंतु एक नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों से कन्नी काट जाते हैं। इसके अलावा बहुत से लोग देश में आज भी अनपढ़ हैं। वे अपने देश के प्रधानमंत्री का नाम भी नहीं जानते, फिर वे यह क्या जानेंगे कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, उनके विचारों में, जीवन स्तर में सुधार लाना- क्या यह हमारा अघोषित कर्तव्य नहीं है? कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करना, यह भी प्रत्येक नागरिक का एक कर्तव्य है।

धारा 51ए: भारतीय नागरिकों के कर्तव्य
भारतीय संविधान की धारा 51ए का समावेश उसमें 1976 से किया गया है। इसके कुछ भूलें बिसरे कर्तव्य नागरिकों से अपेक्षाएं करते हैं जिनका स्मरण करना समय-समय पर जरूरी होता है, जैसे: भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता को बनाए रखना, देश की रक्षा करना और आह्वान हो, तब राष्ट्र सेवा के लिए प्रस्तुत होना क्षेत्रीय अथवा आंचलिक भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों में सामंजस्य तथा सामान्य भाईचारे की भावना प्रोत्साहित करना, तथा, ऐसी प्रथाओं को त्यागना, जो महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल हैं।

अपनी सम्पन्न सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना , वनों, तालाबों, नदियों तथा वन्य प्राणियों सहित समूचे प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण करना तथा उसमें गुणात्मक सुधार लाना। एक विज्ञापन परक दृष्टिकोण सहित मानवता पूर्ण मनोभाव का विकास करना तथा तथ्यपरक जांच के प्रति रूझान पैदा करना सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करना, तथा हिंसा का त्याग करना वैयक्तिक तथा सामूहिक समस्त गतिविधियों में उच्चतर गुणवत्ता लाने के लिए सतत प्रयासशील रहना, ताकि देश उपलब्धियों के नवीन शिखरों तक उठ सके।

द्यप्रत्येक नागरिक ऐसा अभिभावक बने, कि उसके 6 से 14 वर्ष के बालक को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हो।
ये कर्तव्य अपेक्षा करते हैं कि व्यक्ति स्वप्रेरणा से ही इनका पालन करेगा। यदि वह नहीं करता, तो उसे दंड तो नहीं दिया जा सकता केवल उसकी भर्त्सना की जा सकती है।

मुम्बई केवल मराठी भाषी लोगों के लिए हो, जब हम ऐसे विचार पढ़ते हैं, तो तिलमिला जाते हैं। हमारा संविधान कांप उठता है। तब सवाल उठता है, कि कहां से यह फिरकापरस्ती चली आई? हमने तो बात वसुधैव कुटुम्बकम से शुरू की थी।

भविष्यफल तथ्यपरक नहीं है
इसी प्रकार, जब अखबारों की टनों स्टेशनरी 'आज आपका भविष्यफल' जैसी अटकलों पर बरबाद होते देखते हैं तो हमें गुस्सा आना चाहिए। भविष्य बताने वाले क्या हमारे पहनने के रंग, काम के दिन, दिशाएं, सब तय करेंगे? हमें अपने चक्षु बंद करने होंगे? अपना विवेक ताक पर रखना होगा? बच्चों को स्कूल में पढ़ने भेजने की अपेक्षा जब होटलों में, खेतों या रेलवे स्टेशनों में काम करते या भिक्षा वृत्ति करते जब तय देखते हैं, तब हमें अकेले अपना ही नहीं, सबका भविष्यफल स्याह नजर आना चाहिए। दहेज के बिना लड़की की शादी दूभर होना बुरा है और दहेज के आधार पर शादी होकर अगली संतति की नैया भी बहुत सुरक्षित नहीं है। ये प्रश्न हमें सताने चाहिए।

समेकित बाल विकास योजना (आई.सी.डी.एस.) यह बताती है कि देश की 80 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं रक्त की कमी (अनीमिया) से पीड़ित है। उनकी संतानें भी रक्त की कमी के कारण कमजोर होती हैं, जिससे उनके शरीर व मस्तिष्क दोनों का स्वस्थ विकास नहीं हो पाता। दूसरी ओर हमारे गोदामों में अन्न की कमी नहीं।

हमारे यहां शिक्षा अब तक व्यक्ति को व्यावहारिक ज्ञान नहीं दिलाती आई है, जिसका नतीजा होता है कि व्यक्ति स्वरोजगार तलाश नहीं पाता और या तो कृषि से होने वाली न्यून आय पर गुजर करता है या इनी-गिनी नौकरियों की ही प्रतीक्षा करता रह जाता है। हाल ही में इस ओर केन्द्र व राय सरकारों ने कुछ अच्छे कदम उठाए हैं, जिससे आशा जागी है। उनके एक प्रवक्ता का कथन है कि शीघ्र हम इतने अधिक युवाओं को हुनरमंद बनाएंगे और आशा है कि वर्ष 2022 तक भारत के साढ़े पांच करोड़ लोग अपने हुनर के बल पर मुद्रा कमा कर सम्पन्न बन सकेंगे।
जब लोग सम्पन्न बनेंगे, युवाओं को काम मिलेगा, नए-नए छोटे-बड़े उद्योग खुलेंगे, तब भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया बन जाएगी। हम सत्य ही कह उठेंगे 'सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा।' तभी सच्चे अर्थों में हम कह सकेंगे कि हमें अपने संविधान पर गर्व है। (देशबंधु से साभार )

नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सलाकार की नियुक्ति!

रांची ! झारखण्ड सरकार नक्सली हिंसा के खिलाफ शुरू होने वाले अभियान ग्रीन हंट के पहले सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति करने की योजना बना रही है।

राज्य सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने आईएएनएस को बताया, ''ग्रीन हंट शुरू होने से पहले राज्य सरकार एक आंतरिक सुरक्षा सलाहकार नियुक्त करने पर गंभीर रूप से विचार कर रही है। राज्य सुरक्षा सलाहकार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अंर्तगत काम करेंगे, और इनका मुख्य काम नक्सली परिस्थितियों से निपटना होगा।''

उन्होंने बताया, ''भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के उच्च पदों से सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी ही राज्य के आंतरिक सुरक्षा सलाहकार होंगे।''

ग्रीन हंट अभियान को लेकर कुछ भ्रम होने की स्थित में राज्य सरकार यह कदम उठा रही है।

राज्य सरकार के सूत्रों ने बताया, ''राज्य सरकार नक्सलियों से लड़ने के लिए राज्य सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति कर रही है, लेकिन सरकार यह भा चाहती है कि अभियान से निर्दोष ग्रामीणों को कोई परेशानी न हो और वे सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार न बनें।''

नारायणपुर : 3 नक्सली गिरफ्तार

नारायणपुर ! ग्राम टेकानार, मकसोली के जंगल में किसी वारदात को अंजाम देने के फिराक में बैठे तीन नक्सलियों को जिला पुलिस ने धर दबोचा। गिरफ्तार नक्सलियों के कब्जे से टिफिन बम, बिजली के तार व नक्सली पत्रिका आदि को बरामद किया। तीनों नक्सलियों को आज रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात थाना छोरछा से ग्राम टेकानार मकसोली की सर्चिंग पर निकली पुलिस पार्टी को सूचना मिली कि ग्राम टेकानार की जंगल में संदिग्ध अवस्था में तीन नक्सली किसी वारदात को अंजाम देने की कोशिश में है। इस सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर नक्सली कोहलाराम (30 वर्ष), डेगोराम (18 वर्ष) तथा मासोराम (18 वर्ष) को धर-दबोचा। गिरफ्तार नक्सली ग्राम कोसतोड़ी के जंगल में विगत दिनों हुई मुठभेड़ की घटना में शामिल थे। इसके अलावा अनेक मामलों में पुलिस को इनकी तलाश थी। गिरफ्तार नक्सलियों के कब्जे से एक टिफिन बम, बिजली के वायर व नक्सली पत्रिका आदि को बरामद किया गया। थाने में पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने बताया कि वे विगत 27 फरवरी को हुई नक्सली घटना में शामिल थे। गिरफ्तार नक्सलियों को आज ज्यूडिशियल रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया है।

समर्पण करने वाले नक्सलियों को मिलेंगे लाखों रू.

जगदलपुर ! नक्सलियों को अपराध की दुनिया से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने राय शासन नई पुनर्वास नीति बना रही है। जिसके तहत आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए विशेष योजना तैयार की गयी है। इसके तहत शस्त्र के साथ आत्म समर्पण करने वाले नक्सली लखपति बनकर शासन की सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। राय शासन व पुलिस विभाग द्वारा बनायी गयी इस योजना के तहत समर्पण करने वाले नक्सलियों को लाखों रूपयों की ईनाम राशि प्रदान की जाएगी।

नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राय शासन व पुलिस विभाग द्वारा समर्पण की नई विशेष योजना तैयार की गयी है। एलएमजी रायफल के साथ समर्पण पर तीन लाख रूपये, एके-47 के साथ 2 लाख रूपये, 303 रायफल के साथ 50 हजार व 12 बोर बंदूक के साथ आत्म समर्पण करने वाले नक्सली को 20 हजार रूपये की इनाम राशि प्रदान की जावेगी। इसके अलावा आत्म समर्पित नक्सली को ग्रामीण विकास विभाग की आवास एवं स्वरोजगार योजनाओं के अंतर्गत लाभ हेतु सहायता दी जाएगी। यदि नक्सली शिक्षित है, तो शासकीय सेवा व होमगार्ड के पद पर नियुक्ति खेती के लिए सुरक्षित भूमि, नक्सलियों के बच्चों को शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति दी जावेगी। इसके अलावा आत्म समर्पित नक्सली के विरूध्द यदि पूर्व में कोई अपराध पंजीबध्द है तो नक्सली उन्मूलन अभियान में उनके द्वारा दिये गये सहयोग को देखते हुए अपराधिक प्रकरणों को समाप्त करने पर शासन विचार करेगा। साथ ही पुनर्वास हेतु उसके द्वारा चाहे गये स्थान पर आवास एवं भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि नक्सली अपराध की दुनिया से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सके।

आईएएस अफसर के खिलाफ कार्रवाई करे सरकार : लोकायुक्त


रायपुर ! छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त ने नियुक्तियों में अनियमितता के मामले में एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार को भेजी रपट में लोकायुक्त न्यायमूर्ति एल. सी. भादू ने कहा है कि छत्तीसगढ़ महिला समाख्या सोसायटी में निदेशक और सहायक निदेशक की नियुक्तियों में धांधली के लिए सचिव (स्कूली शिक्षा) नंद कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

सोसाइटी ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करती है।

साथ ही कुमार द्वारा नियुक्त निदेशक शालिनी रमन और सहायक निदेशक प्रशांत सुखदेव को भी हटाने की सिफारिश की गई है। लोकायुक्त ने शिक्षा विभाग के तीन अधिकारियों जी. आर. चंद्राकर, आर. के. शर्मा और बजरंग प्रजापति के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की है।

पिछले महीने छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. एल. अग्रवाल को निलंबित कर दिया था, क्योंकि उनके यहां आयकर विभाग का छापा पड़ा था जिसमें पता चला था कि वह 93 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति के मालिक हैं ।


छत्तीसगढ़ शिक्षा सचिव दोषी,लोकायुक्त से शिकायत में हुआ पर्दाफाश

छत्तीसगढ़ लोकायुक्त ने स्कूल शिक्षा सचिव नंदकुमार को भर्ती में अनियमितता में दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। महिला सामाख्या सोसायटी में भर्ती प्रक्रिया में दोषी पाते हुए लोक आयोग ने शासन को शिक्षा विभाग के सचिव नंदकुमार वर्मा एवं विभागीय अन्य अधिकारी जीआर चंद्राकर, आरके शर्मा और बजरंग प्रजापति सहायक प्रोग्राम के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा करते हुए मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव, विधि सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग को अपने सुझाव और अनुशंसा की रिपोर्ट कल प्रेषित किए है। मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह ने पूरी रिपोर्ट का अध्ययन कर कार्रवाई करने कहा है।

लोकायुक्त एलसी भादू एवं लोक आयोग के विधि सलाहकार प्रभात झा ने बताया कि महिला सामाख्या सोसायटी के संचालक एवं उपसंचालक की गुपचुप की गई फर्जी नियुक्ति को निरस्त करते हुए गलत तरीके से चयनित शालिनी रमन और प्रशांत सुखदेवे की सेवा समाप्ति का सुझाव दिया है। लोक आयोग कार्यालय में प्रभात झा ने पत्रकारों को बताया कि महिला सामाख्या सोसायटी द्वारा 04 अप्रेल 2008 को संचालक एवं सहायक संचालक सहित अन्य पदों हेतु विज्ञापन जारी किया गया था जिसे निरस्त कर दिया गया था। समिति द्वारा नियमों को शिथिल कर दोबारा विज्ञापन 04 सितम्बर 2008 को जारी किया गया जिसमें संचालक के पद की आयु को 35-58 को घटाकर 30-50 किया गया और शैक्षणिक योग्यता एमएड की जगह पोस्ट ग्रेजुएट किया गया साथ ही सहायक संचालक के पद पर नियुक्ति हेतु बीएड की जगह बीए कर दिया गया था। ताकि पूर्व निर्धारित लोगों को चयनित किया जा सके। दोबारा विज्ञापन से संचालक पद हेतु 17 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से 15 उपस्थित हुए साथ ही सहायक संचालक के लिए 23 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें से पांच लोगों को चयन के योग्य पाया गया इनमें से तीन लोग साक्षात्कार हेतु उपस्थित हुए। संचालक के पद पर शालिनी रमन और सहायक संचालक के पद पर प्रशांत सुखदेवे का चयन हुआ। उन्होंने बताया कि इसी पद के लिए भर्ती के संबंध में उम्मीदवार स्मृति शर्मा द्वारा लोकायोग को जून 2009 में एक शिकायत की थी। आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया और पूरी प्रक्रिया की जांच की इसमें उजागर हुआ है कि लिखित परीक्षा का 75 प्रतिशत परिणाम जारी किया गया था किंतु उत्तर पुस्तिका जांचा ही नहीं गया है। वहीं भर्ती नियमों को परिवर्तित करने के लिए शिक्षा सचिव की काउंसिल में स्वीकृति लेनी पड़ती है पर उसका पालन नियमत: नहीं किया गया। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में शिक्षा विभाग के सचिव नंद कुमार के दस्तखत से संबंधित कई कागजात पाए गए हैं। महिला सामाख्या समिति में हुई नियुक्ति के संबंध में लोकायुक्त ने स्कूल शिक्षा सचिव नंद कुमार को दोषी पाया है चूंकि वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है अत: उनकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को उचित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है साथ ही इस संबंध में जांच में दोषी पाए जाने पर जीआर चंद्राकर शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार, आर के शर्मा ब्लाक शिक्षा अधिकारी धरसींवा, बजरंग प्रजापति सहायक प्रोग्राम समन्वयक राजीव गांधी शिक्षा मिशन के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की है। लोकायुक्त ने सुझाव दिया है कि किसी भी अधिकारी को राय शासन द्वारा प्रतिनियुक्ति पर भेजने या रखने से पूर्व हाईपावर कमेटी के समक्ष उसकी कार्यप्रणाली एवं व्यवहार तथा कार्यक्षमता का संज्ञान लिया जाकर ही आगे की कार्रवाई करें। मुख्य सचिव, विधि सचिव, वित्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य सचिव एवं महालेखाकार को सम्मिलित किया जाकर हाई पावर कमेटी बनाई जानी चाहिए।

Wednesday, March 3, 2010

हम ऋ णी आदिवासियों के


श्री विश्वजीत, पटना

अगर कभी कोटेश्वर से मेरी बात होती, तो मैं उनसे कहता- "बयान देने से बचें।" लालगढ़ आंदोलन की शुरुआत से लेकर आज तक माओवादी नेता कोटेश्वर ने इतने प्रकार के बयान दिए हैं, जो किसी भी आदमी को विक्षिप्त कर देने के लिए पर्याप्त है। कभी वह लालगढ़ में आलू के गिरते भाव से चिंतित, कभी उन्हीं के आह्वान पर हुए बंद के दौरान प्याज की गाड़ियाँ घूमकर आ रही हैं, जिसके चलते प्याज के भाव बढ़ रहे हैं। इसे लेकर मायूस और फिर सिल्दा शिविर पर माओवादी हमले के बाद यह घोषणा की, "मैं स्वयं उस हमले का नेतृत्व कर रहा था"-इन सारे बयानों को एकत्रित करने पर एक कार्टून फिल्म के शाट्स उभरते हैं, जिसका नायक अलग-अलग भेष बनाकर दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। लेकिन, इस नायक की असलियत तब दर्शकों के सामने आती है, जब बंगला दैनिक "संवाद प्रतिदिन" को दिए गए एक साक्षात्कार में कोटेश्वर कहते हैं, "यद्यपि में ब्राह्मण हूँ, मैंने अपना जीवन आदिवासियों के बीच काम करते बिताया है। मेरे लिए जंगल शुरुआत है और जंगल ही अंत।" (संवाद प्रतिदिन-२६.१०.०९)।


इस बयान में ऊँची जाति का गुरूर कूट-कूट कर भरा है। कोटेश्वर के मुँह से भले ही यह बात असावधानीवश निकली हो, लेकिन बयान उनकी असलियत को बिल्कुल बेपर्द कर देता है। "मैं ब्राह्मण हूँ", यानी की मैं श्रेष्ठ हूँ । मैंने, अपना जीवन आदिवासियों के बीच काम करते बिताया है यानी कि मैं श्रेष्ठ होते हुए भी निकृष्ट लोगों के बीच काम करते हुए बिताया है। मानो कि मेरा त्याग कितना बड़ा है, मेरी तपस्या कितनी कठोर है आदि-आदि। "जंगल शुरुआत है और जंगल ही अंत" यानी कि मैंने अपने ऐशोआराम की जरा भी परवाह नहीं की। कुल मिलाकर, "आदिवासी मेरे एहसान के बोझ के तले दबे पड़े हैं।"

कोटेश्वर हो सकता है ब्राह्मण हो, लेकिन ब्राह्मणों के इतिहास से वे अनभिज्ञ हैं। ब्राह्मणों के विヒद्घ तमाम बगावतों का नेतृत्व तो ब्राह्मणों ने ही किया। इतिहास ऐसे उदाहरणों से पटा पड़ा है। दूसरी बात यह है कि अपनी जातिगत पहचान को कोटेश्वर आज भी धोते चले आ रहे हैं। इसका अर्थ है कि उनका मस्तिष्क बारहवीं सदी से आगे नहीं बढ़ पाया। धार्मिक पहचान को लुत्फ करने की बात तो दूर जो व्यक्ति अपनी जाति पहचान से ही बाहर नहीं आ सका। वह क्या नेतृत्व करेगा दबी-कुचली जनता का? भले ही आदिवासी आज हाशिए पर चले गए हों (जिसके लिए कोटेश्वर जैसा नेता कम जवाबदेह नहीं हैं।) फिर भी हम उनके ऋ णी है। मूर्खों को झेलने की क्रिया जिस अपार सहिष्णुता की माँग करती है, उसे हमने उन्हीं के बतौर कर्ज लिया है।

(लेखक नक्सल विषयों के जानकार हैं।)

नक्सली घटना के बाद घुघलाडीह ग्रामीणों का पलायन शुरू

हवेली खड़गपुर (मुंगेर)। चारो ओर से नदी व पहाड़ से घिरा घुघलाडीह गांव में नक्सलियों द्वारा होली की रात चौकीदार कमलेश्वरी मंडल व पंचायत साक्षरता सचिव कैलाश पंडित की निर्मम गला रेत कर हत्या के बाद दशहतजदा ग्रामीण गांव छोड़ कर कही अन्यत्र जगह पलायन को मजबूर हो गये हैं। ग्रामीण घटना के बाद इतने डरे हुए हैं कि किसी परिचित व अपरिचितों को मोबाइल काल को भी रिसिव करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। वहीं गांव में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। ग्रामीणों को अपनी गाय-भैस की भी चिंता नहीं है। घटना के बाद शाम होते ही ग्रामीण अपने घरों में दुबके नजर आते हैं। बताते हैं कि खुटहन जंगल के किनारे खुलेआम माओवादियों का जत्था घूमते देखा जा रहा है। माओवादियों द्वारा लोक लुभावने वायदे से सीधे सादे नौजवानों को अपनी ओर आकर्षित कर नये चेहरे से घटना को अंजाम दिलवा रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि अनसूनी करने पर गांव के नौजवान लड़कों को गांव छोड़ कर भाग जाने धमकी भी देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई ग्रामीणों ने बताया कि यदि सुशासन सरकार हम लोगों को हथियार लाइसेंस निर्गत करें तो हम लोग लाइसेंस लेने को तैयार हैं। लुका छिपा कर हथियार रखने से पुलिस प्रशासन से पकड़ाने का भी डर रहता है। घटना के बाद गंगटा पंचायत के मुखिया दिनेश्वर पंडित को भी लगातार जान मारने की धमकी दी जा रही है। इधर इस संदर्भ में थानाध्यक्ष अनंत कुमार सिंह ने बताया कि मृतक कैलाश पंडित के पुत्र घनश्याम पंडित के आवेदन पर कुल ग्यारह लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। दोहरे हत्याकांड के बाद नक्सलियों की खोज में बुधवार को डीएसपी केचंद्रा के नेतृत्व में क्षेत्र के कई नक्सल प्रभावित व पहाड़ी क्षेत्रों में छापामारी की गयी, परंतु कोई सफलता हाथ नहीं लगी। छापामारी में सीआरपीएफ डीएसपी सदाराम सिंह, इंस्पेक्टर डी कृष्ण राव, थानाध्यक्ष अनंत कुमार सिंह आदि सहित कई पुलिस जवान मौजूद थे।(जागरण)

नक्सली घटना के बाद घुघलाडीह ग्रामीणों का पलायन शुरू

हवेली खड़गपुर (मुंगेर)। चारो ओर से नदी व पहाड़ से घिरा घुघलाडीह गांव में नक्सलियों द्वारा होली की रात चौकीदार कमलेश्वरी मंडल व पंचायत साक्षरता सचिव कैलाश पंडित की निर्मम गला रेत कर हत्या के बाद दशहतजदा ग्रामीण गांव छोड़ कर कही अन्यत्र जगह पलायन को मजबूर हो गये हैं। ग्रामीण घटना के बाद इतने डरे हुए हैं कि किसी परिचित व अपरिचितों को मोबाइल काल को भी रिसिव करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। वहीं गांव में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। ग्रामीणों को अपनी गाय-भैस की भी चिंता नहीं है। घटना के बाद शाम होते ही ग्रामीण अपने घरों में दुबके नजर आते हैं। बताते हैं कि खुटहन जंगल के किनारे खुलेआम माओवादियों का जत्था घूमते देखा जा रहा है। माओवादियों द्वारा लोक लुभावने वायदे से सीधे सादे नौजवानों को अपनी ओर आकर्षित कर नये चेहरे से घटना को अंजाम दिलवा रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि अनसूनी करने पर गांव के नौजवान लड़कों को गांव छोड़ कर भाग जाने धमकी भी देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई ग्रामीणों ने बताया कि यदि सुशासन सरकार हम लोगों को हथियार लाइसेंस निर्गत करें तो हम लोग लाइसेंस लेने को तैयार हैं। लुका छिपा कर हथियार रखने से पुलिस प्रशासन से पकड़ाने का भी डर रहता है। घटना के बाद गंगटा पंचायत के मुखिया दिनेश्वर पंडित को भी लगातार जान मारने की धमकी दी जा रही है। इधर इस संदर्भ में थानाध्यक्ष अनंत कुमार सिंह ने बताया कि मृतक कैलाश पंडित के पुत्र घनश्याम पंडित के आवेदन पर कुल ग्यारह लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। दोहरे हत्याकांड के बाद नक्सलियों की खोज में बुधवार को डीएसपी केचंद्रा के नेतृत्व में क्षेत्र के कई नक्सल प्रभावित व पहाड़ी क्षेत्रों में छापामारी की गयी, परंतु कोई सफलता हाथ नहीं लगी। छापामारी में सीआरपीएफ डीएसपी सदाराम सिंह, इंस्पेक्टर डी कृष्ण राव, थानाध्यक्ष अनंत कुमार सिंह आदि सहित कई पुलिस जवान मौजूद थे।

शिबू सरकार का रबैया ढुलमुल : सुबोध

पलामू। आपरेशन ग्रिन हंट पर शिबू सरकार ढ़ुलमुल रवैया अपना रही है। इससे राज्य का विकास प्रभावित होना तय है। उक्त बातें केन्द्रीय खाद्य व प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहीं। वे रविवार को स्थानीय चित्रगुप्त मंदिर में संवाददाताओं से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि यह आपरेशन भटके हुए लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने को ह, न कि इसमें नक्सलियों पर दमनकारी कार्रवाई करने का। नक्सलियों की आतंकवादियों से तुलना किये जाने पर केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आतंकवादी एक अलगाववादी शक्ति है, इन्हें देश से बाहर से सहायता मिल रही है जबकि नक्सली अपने ही लोग हैं।

कांकेर में २ नक्सली पकड़ाये ।

कांकेर। बड़गांव थानांतर्गत ग्राम पिपली में नक्सली गश्त सर्चिंग पर निकले पुलिस पार्टी द्वारा विभिन्न वारदातों में संलिप्त दो संघम सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को बड़गांव थाना से बीएसएफ सूबेदार डीएस खुंटे के नेतृत्व में पुलिस पार्टी नक्सली गश्त सर्चिंग हेतु ग्राम पिपली पटेलपारा, मासूर की ओर रवाना हुए थे। इसी दौरान मुखबीर की सूचना पर ग्राम पिपली में घेराबंदी कर अप. क्र. ४/१० /धारा १४७, १४८, १४९, ३०७, १२१ (क) ३,५ वि. अधिनियम में संलिप्त आरोपी संघम सदस्य अमरू राम पोटाई पिता मरिया २५ वर्ष एवं सनेकर पिता नवल राम गोड ४५ वर्ष को पकड़ा गया।

बंगाल में नक्सल नेता पुलिस के हत्थे चढ़ा

कोलकाता । नक्सली कमांडर एम कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का बेहद घनिष्ठ माना जाने वाला एरिया कमांडर वेंकटेश्वर रेड्डी उर्फ तेलुगु दीपक पुलिस के कब्जे में है। उसके जिम्मे छत्तीसगढ़ समेत उड़ीसा,बिहार और झारखंड में नक्सलियों की सशस्त्र कार्रवाई की कमान थी। मैकेनिकल इंजीनियर तेलुगु दीपक विस्फोटक विशेषज्ञ है।


कोलकाता के बेहाला से सटे सरसुना इलाके में व्यस्त रहने वाले बस अड्डे पर प। बंगाल सीआईडी की टीम शिल्दा कांड के "मास्टरमाइंड" की तलाश कर रही थी, लेकिन जब संदिग्ध वेंकटेश्वर रेड्डी उर्फ तेलुगु दीपक को पकड़कर उससे रात भर पूछताछ की गई तो पता चला कि झटके में नक्सलियों की बड़ी मछली पुलिस के हाथ आ गई है। उसकी गिरफ्तारी को हाल के दिनों में पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। बुधवार को उससे बंगाल के डीजीपी भूपिंदर सिंह समेत तमाम आला अफसरों ने पूछताछ की। दीपक नक्सलियों के मिलिट्री कमीशन और राज्य कमेटी का सदस्य है।

वह झारग्राम से धन का इंतजाम करने बंगाल आया था। प्राथमिक पूछताछ में तेलुगु दीपक ने राजधानी एक्सप्रेस को बंधक बनाने, सांकराइल थाने के ओसी का अपहरण और गिधनी में पाँच जवानों को मार गिराने जैसे कांड की योजना में मास्टमाइंड रहने की बात स्वीकार की है। प्रदेश के एडीजीपी राज कन्नाौजिया ने बताया कि तेलुगु दीपक को २० साल से आंध्रप्रदेश में फरार घोषित किया हुआ है। -वहाँ उस पर ५० से अधिक मामले चल रहे हैं। उसने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में पिछले छह महीने में पाँच हजार से अधिक आदिवासियों को नक्सली सैन्य दस्ते में भर्ती कर प्रशिक्षित किया है। जून २००८ में उड़ीसा के मलकानगिरी में ग्रेहाउंड दस्ते पर हमले में तेलुगु दीपक का हाथ था। इस घटना में ३८ जवान मारे गए थे। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में पिछले चार साल में माकपा के ७० से अधिक जोनल और लोकल कमेटियों के नेताओं की हत्या में तेलुगु दीपक का हाथ रहा है। राज कन्नाौजिया ने बताया कि हाल में वह कोलकाता और आसपास के जिलों में नक्सलियों का संगठन खड़ा करने और लालगढ़ में खर्च के लिए धन का बंदोबस्त करने के मिशन पर था।

नक्सल तार में उलझे कृषि मंत्री


कांग्रेस ने की मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने उच्च स्तरीय जाँच की माँग



रायपुर । छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार वे आठ साल पहले लिखी अपनी किताब के कारण कांग्रेस का निशाना बने हैं। कथित नक्सल समर्थक की किताब से उनकी किताब के लेख व अन्य सामग्री में समानता के आधार पर कांग्रेस ने कृषि मंत्री को लपेटा है। कांग्रेस ने श्री साहू पर नक्सलियों से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और मामले की उच्च स्तरीय जाँच की माँग की है।

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा व पूर्व मंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को यहाँ एक पत्रकारवार्ता में आरोप लगाया कि कथित नक्सल समर्थक प्रफुल्ल झा से कृषि मंत्री श्री साहू का संबंध है। प्रफुल्ल झा नक्सलियों को मदद करने और नक्सली साहित्य लिखने के आरोप में इन दिनों जेल में है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कृषि मंत्री श्री साहू और प्रफुल्ल झा के बीच प्रगाढ़ संबंध का प्रमाण यह है कि वर्ष २००१ में श्री साहू ने वैभव प्रकाशन के माध्यम से एक पुस्तक "अकाल मुक्त छत्तीसगढ़ : यथार्थ एवं संभावना" का प्रकाशन कराया। इस पुस्तक में लेखों का संकलन व संपादन प्रफुल्ल झा ने किया है। इसमें एक लेख पलायन के लिए "मजबूर, छत्तीसगढ़िया मजदूर" प्रकाशित हुआ है, जिसका लेखक प्रफुल्ल झा है। वर्ष २००८ में कृषि मंत्री के पद पर रहते हुए श्री साहू ने वर्ष २००१ में प्रकाशित उसी किताब को नए कलेवर में नए शीर्षक के साथ प्रकाशित कराया है। वर्ष २००८ में प्रकाशित किताब का नाम "छत्तीसगढ़ का दिनमान, अकाल व उदयकाल" दिया। वर्ष २००१ में इसी किताब का नाम "अकाल मुक्त छत्तीसगढ़ : यथार्थ व संभावना" था।

इन दोनों किताबों के सारे लेख हूबहू वही हैं, लेकिन अंतर केवल इतना है कि वर्ष २००१ में प्रकाशित किताब के पृष्ठ २७ पर प्रफुल्ल झा के नाम पर प्रकाशित लेख "पलायन के लिए मजबूर, छत्तीसगढ़िया मजदूर" को चुराकर श्री साहू ने वर्ष २००८ की किताब में नए शीर्षक "पलायन की पीड़ा एवं छत्तीसगढ़िया मजदूर किसान की नियति" के साथ स्वयं के नाम से प्रकाशित कराया है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि श्री साहू का लेख कृषि विभाग की सरकारी वेबसाइट "किसान गुड़ी डॉट काम" में भी है। वेबसाइट का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया था। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा के जेल जाने के बाद कृषि मंत्री ने किताब के प्रस्तावना को बदला। प्रस्तावना में पहले विवादित व्यक्तियों के नाम थे। कई विवादित विषयवस्तु भी है, जो काफी आपत्तिजनक हैं। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि एक नक्सली बंदी के लेख को श्री साहू ने चुराकर अपने नाम से क्यों छापा? इससे उनका नक्सली विचारधारा में विश्वास प्रकट होता है। २००१ में प्रकाशित किताब को कबीरपंथी संत श्री अभिलाष दास को और २००८ में उसी किताब को गुヒ गोलवलकर को समर्पित किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा, आरएसएस व रमन सरकार ने अब तक इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की? श्री साहू का मंत्री पद पर बने रहना राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए तत्काल उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए और उनके खिलाफ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस जन आंदोलन करेगी।




प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा व पूर्व मंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को यहाँ एक पत्रकारवार्ता में आरोप लगाया कि कथित नक्सल समर्थक प्रफुल्ल झा से कृषि मंत्री श्री साहू का संबंध है। प्रफुल्ल झा नक्सलियों को मदद करने और नक्सली साहित्य लिखने के आरोप में इन दिनों जेल में है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कृषि मंत्री श्री साहू और प्रफुल्ल झा के बीच प्रगाढ़ संबंध का प्रमाण यह है कि वर्ष २००१ में श्री साहू ने वैभव प्रकाशन के माध्यम से एक पुस्तक "अकाल मुक्त छत्तीसगढ़ : यथार्थ एवं संभावना" का प्रकाशन कराया। इस पुस्तक में लेखों का संकलन व संपादन प्रफुल्ल झा ने किया है। इसमें एक लेख पलायन के लिए "मजबूर, छत्तीसगढ़िया मजदूर" प्रकाशित हुआ है, जिसका लेखक प्रफुल्ल झा है। वर्ष २००८ में कृषि मंत्री के पद पर रहते हुए श्री साहू ने वर्ष २००१ में प्रकाशित उसी किताब को नए कलेवर में नए शीर्षक के साथ प्रकाशित कराया है। वर्ष २००८ में प्रकाशित किताब का नाम "छत्तीसगढ़ का दिनमान, अकाल व उदयकाल" दिया। वर्ष २००१ में इसी किताब का नाम "अकाल मुक्त छत्तीसगढ़ : यथार्थ व संभावना" था। इन दोनों किताबों के सारे लेख हूबहू वही हैं, लेकिन अंतर केवल इतना है कि वर्ष २००१ में प्रकाशित किताब के पृष्ठ २७ पर प्रफुल्ल झा के नाम पर प्रकाशित लेख "पलायन के लिए मजबूर, छत्तीसगढ़िया मजदूर" को चुराकर श्री साहू ने वर्ष २००८ की किताब में नए शीर्षक "पलायन की पीड़ा एवं छत्तीसगढ़िया मजदूर किसान की नियति" के साथ स्वयं के नाम से प्रकाशित कराया है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि श्री साहू का लेख कृषि विभाग की सरकारी वेबसाइट "किसान गुड़ी डॉट काम" में भी है। वेबसाइट का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया था। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रफुल्ल झा के जेल जाने के बाद कृषि मंत्री ने किताब के प्रस्तावना को बदला। प्रस्तावना में पहले विवादित व्यक्तियों के नाम थे। कई विवादित विषयवस्तु भी है, जो काफी आपत्तिजनक हैं। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि एक नक्सली बंदी के लेख को श्री साहू ने चुराकर अपने नाम से क्यों छापा? इससे उनका नक्सली विचारधारा में विश्वास प्रकट होता है। २००१ में प्रकाशित किताब को कबीरपंथी संत श्री अभिलाष दास को और २००८ में उसी किताब को गुヒ गोलवलकर को समर्पित किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा, आरएसएस व रमन सरकार ने अब तक इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की? श्री साहू का मंत्री पद पर बने रहना राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए तत्काल उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए और उनके खिलाफ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस जन आंदोलन करेगी।

सीएम को दी सफाई : कृषि मंत्री श्री साहू ने दोपहर करीब डेढ़ बजे सीएम हाउस जाकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को अपनी सफाई दी। उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा जारी प्रेस नोट को भी मुख्यमंत्री को दिया। इधर, भाजपा प्रदेश महामंत्री शिवरतन शर्मा ने कांग्रेस नेताओं के बयान की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें मानसिक दिवालियेपन का शिकार बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता प्रदेश में गंदी राजनीति का वातावरण तैयार कर रहे हैं और अनर्गल आरोप लगाकर अपनी खोखली मानसिकता को प्रमाणित कर रहे हैं ।
नई दुनिया, मार्च, 2010

Tuesday, March 2, 2010

शीर्ष माओवादी नेता वेंकटेश्वर रेड्डी गिरफ्तार

कोलकाता । शीर्ष माओवादी नेता वेंकटेश्वर रेड्डी उर्फ तेलुगू दीपक को कोलकाता पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग [सीआईडी] ने मंगलवार की रात सवा नौ बजे गिरफ्तार कर लिया। माओवादी कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के सहयोगी की पहचान रखने वाला दीपक नक्सलियों के एक्शन स्क्वाड का कर्ताधर्ता माना जाता है। उसे आंध्रप्रदेश पुलिस की सूचना पर कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना जिले के बेहाला इलाके से गिरफ्तार किया गया।

सीआईडी की टीम मुख्यालय लाकर उससे पूछताछ कर रही है। गिरफ्तार माओवादी नेता तो बुधवार को अलीपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा। आंध्र पुलिस पुलिस की सूचना के बाद जिला पुलिस और सीआईडी की टीम कोलकाता व आसपास के इलाकों में आने वालों संदिग्ध लोगों पर नजर रख रही थीं।

इसी दौरान शक के आधार पर वेंकटेश्वर रेड्डी को हिरासत में लिया गया। उसकी पहचान की पुष्टि होते ही उसे सीआईडी मुख्यालय लाया गया। दीपक से पुलिस की पूछताछ देर रात तक जारी रही। बताया जाता है कि शिल्दा कांड को अंजाम देने में तेलुगू दीपक की अहम भूमिका थी। इस बार वह किसी खास मिशन पर कोलकाता आया था। देर रात माओवादियों के साथ उसकी बैठक होनी थी, जिसमें उस खास मिशन के एक्शन पर चर्चा होनी थी। आंध्र का मूल निवासी वेंकटेश्वर रेड्डी 14 फरवरी को कोलकाता आया था और कुछ दिन रहा था। अपने इसी प्रवास के दौरान उसने शिल्दा कांड की साजिश रची थी।

उल्लेखनीय है कि नक्सलियों ने गत 15 फरवरी को पश्चिम मेदिनीपुर जिले की झाड़ग्राम तहसील के बीनपुर थाना अंतर्गत शिल्दा कैंप पर हमला कर 24 ईएफआर जवानों को मौत के घाट उतार दिया था।



नक्सली गतिविधियों को रोकने में असफल रही सरकार

हसन। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई के पूर्व अध्यक्ष तथा पार्टी के वरिष्ठ सांसद डीवी सदानंद गोडा ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह नक्सली गतिविधियों के बारे में विवरण जुटाने में असफल साबित हुई है। श्री गोडा ने यहां पत्रकारों से कहा कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने कर्नाटक को नक्सल प्रभावित राज्यों की सूची से भले ही हटा दिया है लेकिन राज्य सरकार को नक्सली गतिविधियों से जुडे विवरण जुटाकर नक्सली गतिविधियों को बढने से रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकासात्मक गतिविधियां शुरु कर नक्सली गतिविधियों में शामिल लोगों को मुख्य धारा से जोडने के प्रयास शुरू करने चाहिए। इससे पहले राज्य के एक और भाजपा सांसद कंवर अनंत कुमार हेगडे राज्य के मुख्यमंत्री बी.एस. येदुरप्पा को पत्र लिखकर राज्य में पनप रही नक्सली गतिविधियों की जानकारी दे चुके हैं।

बिहार में नक्सलियों ने २ को मारा

पटना. 02 मार्च। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने एक पुलिस चौकीदार सहित दो लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार भोगलाडीह गांव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 30 से 40 नक्सलियों ने धावा बोलकर चौकीदार कमलेश्वरी यादव और कैलाश पंडित की गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से एक पर्चा बरामद किया गया, जिसमें नक्सलियों ने दोनों पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाया है। उधर, हवेली खड़गपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी क़े चन्द्रा ने मंगलवार को बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और नक्सलियों के खिलाफ छापामारी अभियान तेज कर दिया गया है।

अबूझमाड़ में नक्सलियों की फैक्ट्री ध्वस्त




नई दुनिया, जगदलपुर, ३ मार्च, 2010

Monday, March 1, 2010

नक्सल समर्थकों ने हथियार के बल पर फसल लूटा

जागरण में एक समाचार छपा है । है तो ज़रा पुराना । यानी २७ मार्च की । पर सुनकर नक्सलियों के उद्देश्यों का पता चल जाता है कि वे अंततः किसके लिए काम कर रहे हैं । लीजिए पढ़े आप भी -

खगड़िया। परबत्ता थाना क्षेत्र के बोरवा बहियार में शुक्रवार को हथियार के बल पर नक्सली समर्थकों ने छह एकड़ में लगी मसूर की फसल को लूट लिया। इस संबंध में परबत्ता थाना में जमीन मालिक के निजी कर्मचारी गोंसाई यादव, करना के बयान पर एक मामला दर्ज किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उदय दास, कंचन दास, संजय दास समेत अज्ञात पर मामला दर्ज किया गया है। सभी नामजद सिराजपुर हरिजन टोला के रहने वाले बताये जा रहे हैं। मालूम हो कि उक्त बहियार में नक्सली समर्थकों ने 6 मई 2009 को लाल झंडा गाड़कर अपनी उपस्थिति का एहसास कराया था।

इधर, गोगरी डीएसी मुरलीधर मिश्र ने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले का जायजा लिया। कहा, फसल लूटने वाले नक्सल समर्थक बताये जा रहे हैं। उन्होंने जागरण को बताया कि जमीन मालिक के निजी कर्मचारी के बयान मामला दर्ज किया गया है। मामले की छानबीन की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जमीन मालिक शिवेंद्र नारायण सिंह वर्तमान में छपरा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं।


नक्सल प्रभावित क्षेत्र को 100 नई बसें खरीदेगा निगम

भुवनेश्वर। राज्य सरकार ओड़िशा सड़क परिवहन निगम के लिए और 100 बसें खरीदेगा। इन बसों में कुछ बसें वातानुकूलित होंगी। ये सभी बसें मुख्यत: 8 नक्सल प्रभावित इलाकों में चलायी जाएंगी। इसके लिए बैंक से ऋण लिया जाएगा। वर्तमान निगम के पास 275 बसें हैं, जो मुख्यत: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रही हैं। गुरुवार को सचिवालय में मुख्य शासन सचिव तरुणकान्ति मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उपरोक्त निर्णय लिया गया। यहां उल्लेखनीय है कि निजी बस मालिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बस चलाने के लिए तैयार नहीं हो रहे है। श्री मिश्र ने कहा कि सरकारी व निजी सहयोग से बरमुण्डा बस स्टैण्ड का विकास कर सम्पूर्ण रूप से इसका आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके लिए 56 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी बैठक के बाद परिवहन सचिव सत्यव्रत साहू ने दी है। श्री साहू ने बताया कि पिछले वर्ष नवम्बर महीने में माओवादियों ने 4 बसों में आग लगाकर जला दिया था। बलांगीर छात्र आन्दोलन के समय दो बसों को उत्तोजित छात्रों ने आग के हवाले कर दिया। इससे निगम को एक करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के बाबत देने के लिए बैठक में निर्णय लिया गया।

उड़ीसा में ३ नक्सलियों का आत्मसमर्पण

भुवनेश्वर। उड़ीसा के कंधमाल जिले में रविवार को तीन नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इसमें एक महिला नक्सली भी शामिल है।

कंधमाल के पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया, ''तीनों नक्सलियों ने हमारे सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा व्यक्त की है।''

आत्मसमर्पण करने वाली एकमात्र महिला लेडी मंडल उर्फ कनाला बंसाधारा क्षेत्र में सक्रिय थी। वह वर्ष 2003 में नक्सलियों से जुड़ी थी। पुलिस के अनुसार वह रायगदा और कंधमाल में भी सक्रिय थी।

कनाला के अलावा बिनायक और बिष्णु नाम के नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। दोनों ही बंसाधारा क्षेत्र में सक्रिय थे।

नक्सली बाहुल्य जेलों में लगेंगे मोबाइल जैमर

रायपुर। नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ की जेलों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए राज्य शासन ने छह करोड़ रुपए की लागत से मोबाईल जैमर लगाने का फैसला किया है।

आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि राज्य शासन ने सात विभिन्न जेलों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए लगभग छह करोड़ रुपए की लागत से 25 मोबाईल जैमर लगाने का फैसला किया है।

सूत्रों ने बताया कि जेलों में मोबाईल जैमर लगा कर परीक्षण किया जा रहा है।

इससे किसी भी कंपनी के मोबाइल से एसएमएस और बातचीत पर रोक लगेगी।

जेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के चार केन्द्रीय जेलों, दो जिला जेलों और एक उप जेल में जैमर लगाया जा रहा है।

इनमें केन्द्रीय जेल रायपुर में सात, बिलासपुर में तीन, जगदलपुर में पांच, अम्बिकापुर में छह और जिला जेल उत्तर बस्तर में दो, दंतेवाड़ा में एक और उप जेल कटघोरा में एक मोबाईल जैमर लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि जिन जेलों में मोबाईल जैमर लगाए जा रहे हैं वहां नक्सली बंदी भी हैं।

जेल विभाग के अधिकारियों ने राज्य भर के विभिन्न जेलों में छापे की कार्रवाई कर पिछले दिनों भारी मात्रा में मोबाईल फोन और सिम कार्ड बरामद किए थे।

"नक्सलवाद अपने मार्ग से भटक गया है"




जनसुरक्षा जैसे काक्वनून विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए जाते हैं। जब सरकार को यह लगता है कि मौजूदा कानून, आईपीसी, सीआरपीसी आदि के जरिए विघटनकारी या राष्ट्र विरोधियों को नहीं संभाला जा सकता है, कानून की बारीकी के लिए या राष्ट्रविरोधी कार्य करने वालों से कड़ाई से निपटने के लिए सरकारें ऐसा कानून बनाती हैं। जहां तक छग जनसुरक्षा कानून और मीडिया के संबंध का सवाल है, मेरी जानकारी में इसमें मीडिया के लिए अभी अलग से कोई प्रावधान नहीं किया गया है। पत्र छापने के संबंध में मेरी जानकारी के अनुसार नक्सलवाद अभी प्रतिबंधित नहीं हुआ है। यह एक विचार धारा के रूप में -जाना जाता है, जो आतंकवादी संगठन होते हैं, उससे इसे अभी कंपेयर नहीं किया जा रहा है। नक्सलियों के फेवर में जो चीज आएंगी या प्रचार में या छवि बनानेमें सहायक होगीं, उनके कार्यों को अच्छा बताने की कोशिश करनी वाली सामाग्री को तो एक नजर में उनके द्वारा भेजा हुआ माना जा सकता है। रही बात इनके स्रोत पता करने की तो अभी तो पुलिस ऐसा उपाय कर रही है, टेलीफोन आदि माध्यमों से वह इनका पतासाजी करती रहती है। मेरे हिसाब से अब देश-प्रदेश में जो हालात बने है उसको देखते हुए सरकार को चाहिए कि बाजार, स्टेशनों, चौराहों आदि सार्वजनिक स्थानों में क्लोज सर्किट टीवी लगनी ही चाहिए, सरकार को जागकर अब यह करना चाहिए, नक्सलवाद पहले विचारधारा व सोच थी, लेकिन अब यह भटक गया है, मगर अब आम इंसानों पर हमले होने के बाद यह बदल गया है, अब इसके प्रति लोगों की सोच बदलनी चाहिए। अब इसे समाज सुधारक के रूप में नहीं देखा जा सकता। जहां तक नक्सलियों के बीच पत्रकारों के जाने का सवाल हो तो पत्रकार को इसमें दूत के रूप में देखा जाना चाहिए, वह यह प्रयास करता है कि नक्सलियों की बात या विचार को सामने लाए, ताकि इसका शांति के लिए उपयोग हो, पत्रकार यह समाज हित में करता है, हालांकि पत्रकार को किसी तरह से नक्सलवाद को बढ़ावा देने से बचना चाहिए। उसे सिर्फ नक्सलियों की बातें सामने लानी चाहिए। उसके पक्ष में उसे खड़ा नहीं होना चाहिए। सूत्रों के नाम बताने के संबंध में जो कानून है, उसमें प्रावधान है कि पुलिस अपने मुखबिर, वकील अपने क्लाइंट, पति-पत्नी के बीच की बातचीत किसी को भी न बताने के लिए व्यवस्था है, उसे यह अधिकार प्रदान किया गया है। लेकिन पत्रकार के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, उसे सूत्र का नाम कानूनी रूप से बताना होगा, अगर सरकार या अदालत चाहे। मीडिया स्वतंत्र हैं, मेरा व्यक्तिगत विचार है कि अगर नक्सल सामाग्री राष्ट्रविरोधी है तो इसे नहीं छापना चाहिए। यह देखना चाहिए कि कहीं उसका जनहित, शांति या समाज के मनोबल पर विपरीत असर न पड़े। रही बात स्वतंत्र पत्रकार की तो कोई भी व्यक्ति अगर गलत काम या राष्ट्रविरोधी काम करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। फिर वह चाहे पत्रकार, नेता, वकील, अधिकारी कोई भी हो।

फैजल रिजवी
वरिष्ठ अधिवक्ता
रायपुर

"नक्सलियों को महिमामंडित नहीं करना चाहिए"


जनसुरक्षा अधिनियम और उसमें मीडिया से संसंधित कानूनों की जानकारी नहीं है, इसलिए मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। हां इतना जरूर है कि मीडिया को हमेशा समाज की सच्चाई बगैर किसी भेदभाव व लगाव के जनता के सामने लानी चाहिए। जहां तक नक्सलियों के पत्र छापने का सवाल है तो मेरा व्यक्तिगत विचार यह है कि मीडिया इसे छाप सकता है, लेकिन उसे यह जरूर देखना चाहिए कि कहीं वह सामग्री समाज या राष्ट्रविरोधी तो नहीं और कहीं उसका समाज के मनोबल पर विपरीत असर तो नहीं पड़ रहा। यह काम तो हो सकता, लेकिन मीडिया की भी अपनी आचार संहिता होती है, मेरे हिसाब से उसका काम किसी भी चीज की जांच करने का नहीं है। वह सिर्फ पाठकों-दर्शकों तक सूचना पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होता है। बाकी प्रशासन का काम है कि वह तथ्यों की जांच करें। जो लोग नक्सलियों के पास जाकर बातचीत करके समाचार लाते हैं, मैं इसे भी गलत नहीं मानता, क्योंकि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का हक है। पत्रकार उनकी बात, विचार सामने लाते हैं, वे ही नक्सलियों के नरसंहार या और समाज विरोधी काम को भी जनता के सामने लाते हैं। इसलिए मैं नक्सलियों के संपर्क में सिर्फ समाचार के लिए रहने वाले पत्रकारों को उनके काम का हिस्सा मानता हूं। हालांकि मैं ये भी मानता हूं कि मीडिया को भी अपने सामाजिक दायित्व को समझना चाहिए और बेवजह नक्सलियों को महिमामंडित नहीं करना चाहिए। एक मीडिया वाले की नक्सलियों के साथ संलिप्तता को जो सवाल है, उसमें मैं यह कहना चाहूंगा कि एक की वजह से पूरी बिरादरी को गलत नहीं कहा जा सकता। जो लोग पत्रकारिता की नैतिकता के विरूध्द जाकर अपने निजी स्वार्थ या फायदे के लिए राष्ट्रविरोधी काम करने लगते हैं, उन्हें पत्रकार नहीं माना चाहिए। पत्रकार को सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। उसे किसी लाभ के लिए पत्रकारिकता का लबादा नहीं ओढ़ना चाहिए।

एक व्यक्ति द्वारा किसी समाजविरोधी के साथ विध्वसंक कार्य करने का उसके समूह या बिरादरी असर नहीं पड़ता। इसे ऐसा भी समझा जा सकता है कि आतंकवादी गतिविधियों में 99 प्रतिशत मुस्लिम समाज के लोग शामिल पाए जाते हैं, लेकिन इसकी वजह से आप पूरे समाज को इस नजर से नहीं देख सकते हैं। कुछ गिनती के लोगों की हरकत के लिए किसी बिरादरी को जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए।

श्री वीरेन्द्र पांडेय
वरिष्ठ
राजनीतिज्ञ व छत्तीसगढ़ राज्य वित्त

आयोग के पूर्व अध्यक्ष

"नक्सलियों की बात भी सामने आनी चाहिए"

सरकार ने जिस भी मंशा से अधिनियम बनाया हो, प्रकट तो यही होता है कि वह नक्सलवाद पर नियंत्रण करना चाहती है। छग की परिस्थितियां साधारण नहीं हैं, जब परिस्थितियां साधारण ना हों तो सरकार को ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं, लेकिन सरकार का जो काम करने वाला तंत्र होता है, उसके काम करने का अपना तरीका होता है, जिसमें कई बार कानूनों का दुरुपयोग होता है। कानून का दुरुपयोग ना हो यह सावधानी सरकार के राजनीतिक तंत्र और कार्यकर्ताओं को रखनी होगी। पुलिस और प्रशासन का जो मौजूदा तंत्र है, वह किसी भी चीज में गड़बड़ी का रास्ता तलाश ही लेता है। अगर सरकार इसे काबू में कर ले तो कोई समस्या नहीं है। हम एक डेमोक्रेटिक सेटअप में रहते हैं और उसमें कोई अखबार दूसरे पक्ष को छापता है तो वह गलत नहीं है। वामपंथी विचारधारा वाले लोगों की सहानुभूति उनके साथ होती है, इस तरह के जो राजनैतिक कार्यकर्ता हैं वो अपनी बात कहते हैं, उनकी बात छपती भी है। इसको छापने और न छापने को लेकर तो मैं बात नहीं कर सकता क्योंकि सबको अपनी बात कहने का हक है। अगर किसी को हक दे रहा है अपनी बात कहने का तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आपने देखा होगा कि टेलीविजन चैनलों पर बड़े-बड़े माफियाओं, दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील-बड़ा शकील सबसे बात की जाती है। उस तरह से नक्सली बात कह रहे हैं। बात कहने में कोई बुराई नहीं, वे बात कह सकते हैं और उनकी बात सामने आनी ही चाहिए।

नक्सली बयानों की प्रामाणिकता के बारे में हमें जरूर विचार करना चाहिए। हम लोग इस बात की सावधानी रखते हैं कि जो लोग प्रकट रूप में सामने नहीं आते उनकी बात का क्या औचित्य और कितना आधार है। मुझे नहीं लगता कि अखबार वाले इसे लेकर कोई गंभीर रवैया अपनाते हैं क्योंकि इतना समय नहीं होता कि हर चीज की जांच की जा सके। जो लोग समाज में हैं ही नहीं और भूमिगत तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं, उनके बारे में जांच करना कठिन हो जाता है। उसका तरीका यही है कि हम इस तरह की चीजों को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देते। कम से कम मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि मैं इन चीजों को अपने अखबार में ज्यादा तवाो नहीं देता। नक्सलियों को ट्रेस करने का काम सरकार का है, इसमें कोई मदद मांगेगा तो की जाएगी। दरअसल यह अखबार वाले का काम नहीं है कि वह नक्सलियों के पीछे लगे और उसकी जांच करे। यह सरकार का काम है कि वह अपने तरीके से इन चीजों की जांच करे और पता लगाए।

इस मामले में मैं अपने आप को असहाय महसूस करता हूं। क्योंकि मेरे सामने कोई प्रकट रूप में आता तो नहीं है, और न यह कहकर आता है कि मैं नक्सली हूं। दिनभर में बहुत सारे लोग अखबार के दफ्तरों में विज्ञप्ति देकर जाते हैं, इसमें एक-एक को वॉच तो नहीं किया जा सकता है और हमारे यहां क्लोज सर्किट का इंतजाम भी नहीं है। आप कैसे वॉच करेंगे कि वह कौन सी विज्ञप्ति देकर गया है, पता चला किसी धार्मिक आयोजन की विज्ञप्ति देने वाला अंदर हो गया क्योंकि उसकी पुलिसवाले से दुश्मनी थी। इस तरह के प्रयोगों के बहुत सारे खतरे हैं।

अधिनियम तो सरकार ने बनाया है, उसे जो बिंदु शामिल करने थे उसने शामिल कि ए हैं। ये तो कानून बनाने वालों से ही पूछा जाना चाहिए कि वे इन चीजों को क्यों कर रहे हैं। दूसरी बात मैं नक्सलियों से बातचीत करने, संवाद करने को गलत नहीं मानता। क्योंकि सरकार भी कहीं न कहीं ये कहती रही है कि हम नक्सलियों से बात करेंगे, आंध्र जैसे कई राज्यों में नक्सलियों से चर्चा की भी गई। वे टेबल पर आए और सरकार ने इनसे बात की।
अनेक जगहों पर जहां हिंसक आंदोलनों या आतंकवादी आंदोलनों में जो लोग रहे उनसे बात की गई। बात की भी जाती है, क्योंकि हम जिस गणतंत्र में रहते हैं, जिस लोकतंत्र की बात कहते हैं , उसमें अंतत: बातचीत से ही चीजें हल होंगी। समस्या यही है ना कि नक्सली बंदूक लेकर आ रहा है, कहा उससे यह जा रहा है कि हथियार रखकर आइए और बात कीजिए। अगर वह हथियार रखकर बातचीत करता है या संवाद का रास्ता अपनाता है तो लोकतंत्र में बातचीत के अलावा समाधान क्या है। लोकतंत्र में तो बातचीत करने का स्पेस है ही और यह अकेली व्यवस्था है कि सबको बातचीत के आधार पर अपनी समस्या का समाधान खोजने का हक है। और मुझे लगता है कि अगर नक्सली इस प्लेटफार्म पर आते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। उनसे बातचीत हो जाए विमर्श हो जाए तो इससे अच्छी क्या बात हो सकती है, अगर ऐसी परिस्थिति पैदा हो जाए तो मुझे लगता है कि पूरे देश को इससे राहत मिलेगी, छत्तीसगढ़ को भी फौरी तौर पर फायदा होगा।

लेकिन बातचीत का जो इस्तेमाल है, या बातचीत के समय का जो इस्तेमाल है, नक्सली इसे अपनी रणनीति बनाने, अपनी तैयारी करने और विश्रामकाल के लिए करते हैं कि बातचीत करके सरकार को गुमराह करते हैं, ताकि सरकार थोड़े समय के लिए आपरेशन बंद कर दे। ये जो चालाकियां हैं वह ठीक नहीं हैं और मुझे लगता है कि इसमें सरकार जो है-जैसी है वो तो ठीक है पर नक्सलियों का इरादा भी बहुत बातचीत करके समाधान निकालने का नही है।

सूचनाएं देना नैतिकता और अनैतिकता का प्रश्न नही है। हमारा काम सूचना देना है, हम इसके चक्कर में फंसेंगे तो बहुत सारी सूचनाओं से अपने पाठकों को वंचित कर देंगे। हम बहुत सारे ऐसे लोगों की खबर छापते हैं, तमाम ऐसे राजनेता हैं जो बहुत गलत कामों में लिप्त हैं, बड़े-बड़े अपराधों में शामिल लोगों की भी चीजें छपती हैं तो नक्सली भी अगर कोई अपनी बात कह रहा है या किसी विचार के तहत अपनी बात कहना चाह रहा है तो उसकी बात और चीजें छपेंगी। कोई बड़ी घटना हो गई जिस पर वह वक्तव्य देना चाहता है तो ये छापी जातीं हैं। बेनजीर भुट्टो की हत्या हुई, एक आतंकवादी संगठन ने कहा कि हमने हत्या की है, तो उसका नाम तो हमें छापना ही पड़ेगा। वह किसी भी स्रोत से बताए, ई-मेल भेजकर या विज्ञप्ति के माध्यम से या अखबार के दफ्तर में फोन करके। हम अपने पाठक को सूचना से वंचित नहीं कर सकते।

हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी सूचना देने की है, उसमें हम कहीं नक्सली या आतंकवादी के पक्ष में दिखें तो आप हमारी नैतिकता-अनैतिकता पर प्रश्न उठा सकते हैं। हमें जहां से भी सूचना प्राप्त होती है, हो सकता है कि वह अधूरी हो, कच्ची हो, जो हमें सूचना दे रहा है गलत भी हो , तो हम उनके मार्फत ही छापते हैं। जांच करने का काम हमारा नहीं है, और इसके लिए न सरकार ने कोई हथियार या अधिकार हमें दिए हैं। यह जिम्मेदारी हम ले भी नहीं सकते। हमारा काम सूचना को सामने ला देना है।

पत्रकार को कोई विशेषाधिकार तो है नहीं, न कोई मजिस्ट्रेट पॉवर है। गलत काम में लिप्त पत्रकार जेल जाते रहे हैं, पहली बार पत्रकार कोई जेल गया है, ऐसा तो है नहीं। जो भी कोई गलत काम करता है तो सरकार के पास पर्याप्त अधिकार और कानून हैं, जनसुरक्षा कानून की भी जरूरत नहीं है। ऑलरेडी आपके पास इतने सारे कानून हैं, राजद्रोह जैसा कानून है, जिसके तहत गलत काम करने वालों को अंदर कीजिए। मगर इतना भर ध्यान रखने की जरूरत है जिसे मैं बार-बार कह रहा हूं कि इसके चलते किसी निरीह और निर्दोष आदमी का गला सरकार-पुलिस के हाथ में नहीं आना चाहिए।

कलम की आजादी पर हमले होते रहे हैं, अगर कोई अतिरिक्त आजादी लेता है तो उसे सजाएं भी होती रही हैं। यह पहली बार थोड़ी है कि पत्रकार जेल गया है। अभी मिड डे के पत्रकारों को सजा हुई है एक मामले में। तो पत्रकारों को सजा होना, जेल जाना यह नई बात नहीं है, ये तो होता रहेगा। लेकिन कानून का दुरुपयोग न हो इस पर अगर सरकार रख ले तो उसे पत्रकारों का भी समर्थन मिलेगा। हम खुद भी नहीं चाहते कि हमारी बिरादरी के लोग बदनाम हों या गलत काम में शामिल हों।
रीडर,
जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचा विश्वविद्यालय प्रेस कॉम्पलेक्स, महाराणा प्रताप नगर, भोपाल, मध्यप्रदेश - ४६२००१


सी.आर.पी.एफ. बन रही मददगार


नई दुनिया, १ मार्च, 2010

नक्सल मोर्चे पर होगी सीधी बात

वीडियोकांफ्रेसिंग से जुड़े सारे ब्लॉक मुख्यालय

छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिला और ब्लॉक मुख्यालयों के थाने अब सीधे पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) से जुड़ गए हैं। इसके लिए थानों से लेकर पीएचक्यू तक वीडियो कांफं्रेसिंग की व्यवस्था की गई है। इससे सबसे ज्यादा फायदा नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों और अफसरों को हो रहा है। लगभग हर दिन पीएचक्यू के वरिष्ठ अफसर थानेदारों से सीधी बात कर उनकी हौसला अफजाई कर रहे हैं।

पुलिस अफसरों के अनुसार पीएचक्यू और थानों के बीच वीडियो कांफं्रेसिंग का प्रस्ताव काफी पुराना था, लेकिन तकनीकी कारणों से यह पूरा नहीं हो पा रहा था। करीब पखवाड़ेभर पहले चिप्स के सहयोग से इसे व्यवस्थित किया गया है। वीडियो कांफं्रेसिंग के लिए पुलिस मुख्यालय के सभा कक्ष, जिलों में एसपी कार्यालय, एसडीओपी कार्यालयों में क्रांफेसिंग की व्यवस्था की गई है।

वीडियो कांफं्रेसिंग के माध्यम से एक साथ आधा दर्जन से अधिक जिलों से बात की जा सकती है। अफसरों ने बताया कि इस सुविधा के माध्यम मैदानी पुलिस कर्मियों की समस्या और दिक्कतों को वरिष्ठ अफसरों तक आसाना से पहुँचाया जा सकता है। वहीं, वरिष्ठ अफसर भी महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी लेने के साथ ही मागदर्शन भी दे सकते हैं।

अफसरों के अनुसार वीडियो कांफं्रेसिंग का सबसे ज्यादा फायदा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों और अफसरों को होगा। सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले डीजीपी विश्वरंजन ने दंतेवाड़ा एसपी और डीआईजी के साथ ही कुछ संवेदनशील थानों के अफसरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। इस दौरान डीजीपी ने थानेदारों से वहाँ के हालात और उनकी दिक्कतों के संबंध में पूछा।

पीएचक्यू के वरिष्ठ अफसरों के अनुसार इस सिस्टम का उपयोग फोर्स का मनोबल बढ़ाने के लिए करने पर भी विचार किया जा रहा है। अफसरों ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सुदूर थानों जहाँ से नियमित संपर्क नहीं हो पाता, उन्हें भी इसके माध्यम से जोड़ने की योजना है।

साथ ही हर महीने प्रभावित क्षेत्रों में तैनात राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों को भी वरिष्ठ अफसरों से सीधी बात करने का मौका देने पर विचार किया जा रहा है। पीएचक्यू की इस मुहिम का उद्देश्य मैदानी स्तर पर काम कर रहे जवानों की समस्याओं की जानकारी हासिल करना और उनकी हौसला अफजाई करना है।