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Thursday, May 27, 2010

नक्सलियों ने जलाया मोबाइल टावर

गुरुआ (गया) । प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के हथियारबंद दस्ते ने जिले के गुरारू थाना के मंगरावां गांव में स्थित एक निजी कंपनी के मोबाइल टावर, जेनरेटर और डीजी मशीन को पेट्रोल छिड़ककर गत सोमवार की रात आग लगा दी।

नक्सली केन्द्र सरकार के आपरेशन ग्रीन हंट के विरोध में नारेबाजी की। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि आपरेशन ग्रीनहंट के तहत कार्रवाई बंद नहीं हुई तो अंजाम और बुरा होगा। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष की नक्सलियों द्वारा हत्या

दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष की गोली मारकर हत्या कर दी है।राज्य की पुलिस विभाग के प्रवक्ता पुलिस महानिरीक्षक आर के विज ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के केरलापाल गांव में नक्सलियों ने आज शाम जिले के पूर्व भाजपा अध्यक्ष बुधरा सोढ़ी की गोली मारकर हत्या कर दी है। विज ने बताया कि जिले के सुकमा कस्वे में रहने वाले सोढ़ी आज अपने रिश्तेदार के यहां वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने केरलापाल गांव गए हुए थे। इस दौरान तीन नक्सलियों ने सोंढ़ी को घर से बाहर बुलाया और देशी कटे से गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही परिवारजनों ने सोढ़ी को अस्पताल पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

विज ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर किया है तथा हमलावरों की खोज शुरू कर दी गई है।इधर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सोढ़ी की हत्या पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे नक्सलियों का अमानवीय क्रत्य कहा है।सिंह ने कहा है कि सोढ़ी की हत्या कर नक्सलियों ने अपने अमानवीय चेहरे को एक बार फिर उजागार किया है। नक्सलियों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर कम, हिंसा और आतंक के जरिए अपनी लोकतंत्र विरोधी निरंकुश मानसिकता का परिचय दिया है।

गौरतलब है कि राज्य का बस्तर क्षेत्र सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित क्षेत्र है तथा नक्सली यहां लगालगातार जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बना रहे है। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले में जहां भाजपा के ब्लाक अध्यक्ष की हत्या कर दी थी वहीं लगभग छह महीने पहले राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मंत्री केदार कश्यप के भाई तानसेन कश्यप की जगदलपुर जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर गोली मार कर हत्या कर दी थी।

Monday, May 24, 2010

नक्सली हमले में शामिल कमांडर गिरफ़्तार

दंतेवाड़ा के चिंतलनार में हुए हमले में शामिल नक्सली कमांडर को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। नक्सली कमांडर को सोमवार को मीडिया के सामने पेश किया गया।आरोपी कमांडर बारसे लखमा के साथ पुलिस ने 5 और लोगों को भी मीडिया के सामने पेश किया। इन तमाम लोगों की गिरफ़्तार रविवार को हुई थी।गिरफ़्तार नक्सली ने बताया कि वो हमले के दिन अपने साथ 30 लोगों के साथ चल रहा था। इन लोगों पर चिंतलनार से निकली फोर्स की निगरानी की ज़िम्मेदारी थी। नक्सली ताड़मेटला में घात लगाकर बैठ गए जहां डेढ़ घंटे तक फ़ायरिंग हुई। इस हमले में नक्सलियों ने घायल जवानों को गोली मारकर उनका सामान लूट लिया था।घटना को अंजाम देने के बाद नक्सली कमांडर पापा राव ने गांव में जाकर नक्सलियों को बधाई भी दी थी । पापा राव ने कहा था कि लड़ाई जारी रखना है।मालूम हो कि हमले के दौरान जवानों के गुम हुए वायरलेस सेट से नक्सलियों को ताज़ा जानकारी मिल रही थी । इसी जानकारी के आधार नक्सलियों ने चिंतलनार में बड़ी वारदात को अंजाम दिया जिसमें कुल 76 जवानों की मौत हुई थी । इनमें 74 सीआरपीएफ़ के जवान थे जबकि दो लोग स्थानीय पुलिस के भी थे ।

Sunday, May 23, 2010

नक्सलियों ने मिलकर एक वृद्ध का गला रेत दिया


नई दुनिया, जगदलपुर, २४ मई, 2010

नक्सलियों द्वारा अपहृत वकील मुक्त

बीजापुर । आवापल्ली थाना क्षेत्र के मुरदण्डा गाँव से दो दिन पहले अपहृत नोटरी सल्लूर एंकटी को नक्सलियों ने मुक्त कर दिया है। बताते हैं कि शनिवार की शाम माओवादियों ने उन्हें छोड़ दिया। अपहरण का कारण अज्ञात है। पुलिस के मुताबिक वकील से पूछताछ की गई लेकिन वे ना तो रिपोर्ट लिखाने के पक्ष में हैं और ना ही अपहरण का ब्यौरा देने के पक्ष में। वकील ने पुलिस को बताया कि नक्सलियों ने उनसे बातचीत की और फिर उन्हें छोड़ दिया। नक्सलियों से उनकी क्या बात हुई, इस बारे में नोटरी श्री एंकटी मौन हैं।

क्सलियों ने बनाया १२ ग्रामीणों को बंधक

बीजापुर । कल से नक्सलियों ने मद्देड़ थाना क्षेत्र के लोदेड़ और पामगल गाँव के बारह ग्रामीणों को बंधक बना रखा है। दो दिन पहले इनका अपहरण किया गया था। इनकी पतासाजी की जा रही है। इस बारे में थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। अपहरण का कारण अज्ञात है। एसपी अविनाश मोहंती ने बताया कि पुलिस को इस बारे में सूचना मिली है लेकिन रिपोर्ट नहीं होने से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट दर्ज होने पर ही इसकी पुष्टि की जा सकती है।

Saturday, May 22, 2010

चालीस किलो विस्फोटक वाली बारूदी सुरंग मिली

कांकेर । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में पुलिस को 40 किलो विस्फोटक वाली बारूदी सुरंग मिली है। वहीं नागपुर में एक स्थानीय अदालत ने नक्सलियों को कथित रूप से गोला-बारूद सप्लाई करने वाले एक व्यक्ति को पुलिस रिमांड में भेज दिया।

कांकेर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिला पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के संयुक्त गश्ती दल को फरफुदी गांव के पास एक बारूदी सुरंग मिली है जिसमें 40 किलो विस्फोटक लगाया गया है। गश्ती दल को मिली गुप्त सूचना के आधार पर इसे निकाल गया। बाद में इसे निष्क्रिय कर दिया गया। इसके साथ ही पिछले दो सप्ताह में 180 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया जा चुका है।

यादव ने बताया कि नक्सलियों ने कांकेर में हाइवे के साथ यह बारूदी सुरंग बिछा रखी थी। विस्फोटक की इतनी मात्रा का मतलब यही निकलता है कि वे किसी बड़ी घटना को अंजाम देना चाहते थे।

उधर, हाल ही में आंध्र प्रदेश में गिरफ्तार किए गए और बाद में नागपुर पुलिस के हवाले कर दिए गए नक्सलियों के एक कथित आ‌र्म्स सप्लायर को नागपुर की एक स्थानीय अदालत ने 28 मई तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है।

पुलिस ने बताया कि सुनील कुमार विष्णु प्रसाद उर्फ नागार्जुन कथित रूप से कई श्रोतों से हथियार व गोला-बारूद जुटाता था और फिर नियमित रूप से माओवादियों को सप्लाई करता था। प्रसाद 2006 से ही भगोड़ा हो गया था। उस पर आ‌र्म्स एक्ट व गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत नागपुर के पुलिस स्टेशन में दर्ज थे।

Thursday, May 20, 2010

माओवादियों से निपटने में सेना की मदद नहीं - मुख्यमंत्री

कोलकाता। मुख्यमंत्री बुद्धदेव भंट्टाचार्य ने कहा कि माओवादियों से निपटने के लिए सेना की मदद नहीं ली जायेगी। माओवादी गतिविधियां रोकने के लिए जंगल महल में सेना के जवानों को तैनात करने की जरूरत नहीं है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अभियान शुरू हुआ है लेकिन उसी तरह का अभियान पड़ोसी राज्यों झारखंड और उड़ीसा में शुरू नहीं होने पर बंगाल में माओवादियों को पूरी तरह नियंत्रण करना संभव नहीं होगा। श्री भंट्टाचार्य ने एक निजी बांग्ला टीवी चैनल को दिये साक्षात्कार में यह बाते कही। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियां रोकना तब तक संभव नहीं होगा जब तक समान रूप से पुलिस अभियान झारखंड और उड़ीसा में चालू नहीं होता। उन्होंने माओवादियों से निपटने में सेना की मदद लेने इनकार किया। उन्होंने कहा कि माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आम लोगों का संगठित होना भी जरूरी है। सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेज करने पर ध्यान दे रही है। सार्वजनिक वितरण प्रंणाली के जरिये सबको राशन उपलब्ध कराने, पेय जल तथा पर्याप्त स्कूलों की व्यस्था करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माओवादी समस्या के लिए आर्थिक-,सामाजिक कारणों के जिम्मेदार के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक कारण हो सकता है लेकिन माओवादी भौगोलिक रूप से दुरुह क्षेत्र को अपनी गतिविधियों के संचालन का केंद्र बना रहे हैं।

एक ट्रक बारूद लूटा नक्सलियों ने

नारायणपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नक्सलियों द्वारा लूटे गऐ अमोनिया नाइट्रेट के बारे में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक सुंदरराज पी ने आज बताया कि जिले के भानपूरी क्षेत्र के अंतर्गत मंगलवार को नक्सलियों ने एक ट्रक को अगवा कर उसमें भरे 17 टन अमेनिया नाइट्रेन को लूट लिया। नक्सलियों ने जब बुधवार रात ट्रक चालक को रिहा किया तब इसकी जानकारी मिल सकी।

सुंदरराज ने बताया कि पुलिस ट्रक चालक से पूछताछ कर रही है। उससे मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने बताया कि पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश के शहर विशाखापटनम से रायपुर के लिए ट्रक के जतिरए 17 टन अमोनिया नाइट्रेन रवाना किया गया था। मंगलवार को जब ट्रक भानपुरी क्षेत्र में पहुंचा तब नक्सलियों ने ट्रक को अगवा कर लिया और दूसरे दिन बुधवार को चालक को ट्रक संहित छोड़ दिया। इस घटना की जानकारी जब ट्रक चालक ने अपने मालिक को दी तब मामले की रपट लिखाई गई। पुलिस अधिकरी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने ट्रक चालक से पूछताछ शुरू की और विस्फोटकों की खोज शुरू की गई लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई सुराग नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अमोनिया नाइट्रेट का इस्तेमाल फर्टीलाइजर के रूप किया जाता है, लेकिन नक्सलियों इसमें अन्य सामान मिलाकर इसका इस्तेमाल विस्फोटक के रूप में करते है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस इस संबंध में ट्रक चालक और ट्रक मालिक से पूछताछ कर रही है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी नक्सलियों ने भानपुरी इलाके से डेटोनेटर से भरे ट्रक की लूट लिया था जिसका कोई सुराग नहीं मिला पाया है।

नक्सलियों ने पटरी उड़ाई, मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त

पटना।बिहार के मुजफ्फरपुर रेलखंड पर नक्सलियों ने गुरुवार की सुबह करीब दो बजे जीवधारा और पीपरा रेलवे स्टेशन के बीच रेल पटरी को उड़ा दिया , जिससे एक टैंकर मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई तथा इसकी १३ बोगियों में आग लग गई। पुलिस के अनुसार मोकतहारी जिला के बंगारी हॉल्ट के समीप नक्सलियों ने रेल पटरी को विस्फोट कर उड़ा दिया। इसके बाद इस पटरी पर एक टैंकर मालगाड़ी आ रही थी , जो दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मुजफ्फरपुर राजकीय पुलिस बल के पुलिस अधीक्षक अवधेश शर्मा ने गुरुवार को बताया कि इस घटना में मालगाड़ी की १३ बोगियों में आग लग गई। सभी बोगियों में डीजल और केरोसिन तेल भरा होना बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है तथा घटनास्थल पर पुलिस पहुंचकर मामले की जांच कर रही है। घटना के बाद इस रेलमार्ग पर आवागमन ठप हो गया है। गौरतलब है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( माओवादी ) ने बिहार सहित पांच राज्यों में सोमवार मध्य रात्रि से ४८ घंटे के बंद का आह्वान किया था।

विस्फोटकों की तलाश यातायात प्रभावित


नई दुनिया, 21 मई, 2010

Wednesday, May 19, 2010

नक्सली बंद से झारखंड को तीन अरब की चपत

रांची । नक्सलियों की बंदी ने झारखंड के आर्थिक विकास की गति धीमी कर दी है। हर महीने होने वाली बंदी से कारोबार का बुरा हाल है। दो दिनों की ताजा बंदी में करोड़ों रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसके अतिरिक्त नक्सल प्रभावित इलाकों में बाजार, बैंक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहने से भी करोड़ों का नुकसान हुआ है। इन दो दिनों में झारखंड में कम से कम तीन सौ करोड़ के नुकसान का अनुमान है।

सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों में ढुलाई नहीं होने से दो दिनों में तीस करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसी तरह अयस्कों की ढुलाई ठप होने से प्रति दिन 47 करोड़ अर्थात दो दिनों में 92 करोड़ रुपए, बाजारों में कारोबार नहीं होने से दो दिनों में एक सौ करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। ढुलाई कार्य में लगे लगभग पांच हजार ट्रक व ढाई हजार बसें भी नक्सली बंद के चलते दो दिनों तक नहीं चलीं। इससे भी करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

डालटनगंज में दो दिनों की नक्सली बंदी के कारण जिले के व्यवसायियों को करीब 15 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। आरएमडी सेल भवनाथपुर में लाइम स्टोन व डोलोमाइट ढुलाई ठप रही। लातेहार में बंदी से दो करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। हजारीबाग जिले को करीब एक सौ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सीसीएल महाप्रबंधक प्रभाकर चौकी ने बताया कि उनकी चार परियोजना तापिन, परेज, केदला वाशरी व झारखंड में कोयले का उत्पादन तो हुआ, लेकिन न ही ढुलाई हो सकी और न ही डिस्पैच। इस कारण हमें दो दिनों में तकरीबन 60 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वहीं ट्रांसपोर्टरों को भी लाखों का नुकसान पहुंचा।

रेलवे को भी हुआ भारी नुकसान

कोडरमा जिले में धनबाद रेल मंडल में कोयले की ढुलाई का काम ठप रहा इसमें करीब दस लाख से अधिक का नुकसान रेलवे को हुआ। लोहरदगा में भी दस करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। जिले में बाक्साइट खनन पूरी तरह से बंद रहा। बेरमो जिले में सीसीएल को करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है वहीं बोकारो थर्मल पावर प्लांट, चंद्रपुरा थर्मल पावर प्लांट और तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। धनबाद रेल मंडल में कोयला समेत अन्य सामानों अन्य सामानों की दोनों दिन 9-9 रैक की ढुलाई नहीं हो सकी। इससे करीब साढ़े चार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं कई सवारी ट्रेनों के रद होने से यात्री किराये के मद में 40 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद असरदार

रांची । माओवादियों की 48 घंटे की बंदी के दूसरे व अंतिम दिन बुधवार को पश्चिम बंगाल, झारखंड व उड़ीसा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद असरदार रहा। उल्लेखनीय है कि माओवादियों ने दस सूत्री मांगों को लेकर बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ व बिहार में दो दिवसीय बंद का आह्वान किया था।

बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिला के जंगल महल क्षेत्र में बंद प्रभावी रहा, जबकि पुरुलिया व बांकुड़ा में बंद का मिलाजुला असर दिखा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन अपेक्षाकृत काफी कम हुआ। झाड़ग्राम व मेदिनीपुर तहसील के बीनपुर, बेलपहाड़ी, नयाग्राम, लालगढ़, सिंजुआ, धर्मपुर, मालबांधी, शालबनी, ग्वालतोड़ समेत झाड़ग्राम शहर में बंद के कारण सन्नाटा पसरा रहा। उड़ीसा के नक्सल प्रभावित मलकानगिरी क्षेत्र में बंद असरदार रहा, जबकि सुंदरगढ़ जिले में आंशिक असर देखा गया।

झारखंड के पलामू, सिमडेगा, लातेहार, गुमला, पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला, खूंटी में बंद असरदार रहा। गढ़वा, चतरा, लोहरदगा, गिरिडीह व रांची के ग्रामीण क्षेत्रों में बंद का मिलाजुला असर देखा गया, जबकि अन्य जगहों में जनजीवन सामान्य रहा।

नक्सल बंद के दौरान नागरिकों में डर कायम

रायपुर। नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में नक्सल बंद के दूसरे दिन पश्चिम बंगाल में नक्सली घटना के बाद राज्य में पुलिस को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। वहीं बस्तर क्षेत्र के निवासी डरे हुए है।

राज्य में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज बताया कि नक्सलियों द्वारा बंद के आहवान को देखते हुए राज्य में सभी जिलों और थानों को सतर्क कर दिया गया है वहीं पश्चिम बंगा की घटना के बाद राज्य के सीमावर्ती जिलों और थानों को विशेष चौकसी बरतने के लिए कहा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा क्षेत्र में नक्सली लगातार रेल्वे ट्रेक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते है इसलिए इन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

दंतेवाड़ा जिले के सूत्रों ने बताया कि यात्री बस पर नक्सली हमले में 31 लोगों के मारे जाने की घटना के बाद से यहां के बस नहीं चला रहे है। दंतेवाड़ा के नागरिकों और दुकानदारों ने घटरना के विरोध में मंगलवार को शहर बंद रखा था लेकन आज बाजार खुले हुए है।

दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के एक व्यापारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं और बंद से उनका व्यापार प्रभावित हुआ है तथा अब यात्राकरने में भी डर लग रहा है। व्यापारी ने बताया कि उसे जरूरी काम से सुकमा जाना था, लेकिन परिजनों के कहने के बाद अभी उसने यात्रा टाल दी है।

उन्होंने बताया कि लोग सुकमा और कोंटा जैसे जगहों पर यात्रा करने से डर रहे है।

इधर बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक अविनाश मोहंती ने बताया कि बंद के दूसरे दिन शहरी क्षेत्रों में बसे और अन्य वाहन चल रहे है लेकिन आवापल्ली जैसे अंदरूनी क्षेत्रों में बस आपरेटरों द्वारा बस नहीं चलाने के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कते आ रही है।

मोहंती ने बताया कि बल के जवान मुस्तैद है तथा क्षेत्र में अभियान जारी है।

कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने बताया कि जिले के शहरी क्षेत्र में बंद का कोई असर नहीं है तथा अभी तक स्थिति सामान्य है। अंदरूनी क्षेत्रों में आवागमन पर असर पड़ा है लेकिन सुरक्षा बल के जवान स्थिति को सामान्य करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में नागरिकों पर नक्सली हमले के बाद बस्तर क्षेत्र के निवासी सहमे हुए है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बल उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे है।

बारूदी सुरंग विस्फोट में सीआरपीएफ के 4 जवान शहीद

कोलकाता. 19 मई. पश्चिमी मिदनापुर जिले के लालगढ़ क्षेत्र में बुधवार को गश्त लगा रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के एक वाहन के बारूदी सुरंग की चपेट में आने से हुए विस्फोट में चार जवान शहीद हो गए और दो घायल हो गए। नक्सलियों द्वारा पांच रायों में किए गए दो दिवसीय बंद के दूसरे दिन लालगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के पिंगबोनी और रामगढ़ के बीच नक्सलियों का यह तांडव हुआ। नक्सली अपने खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा चलाए रहे संयुक्त सुरक्षा अभियान को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। पश्चिमी क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जुल्फिकार हसन ने विस्फोट की पुष्टि करते हुए बातचीत में कहा- चार जवानों की मौके पर ही मौत हो गई। दो घायल भी हुए हैं। घायलों को पश्चिमी मिदनापुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुरक्षा बल घने जंगलों में गश्त लगा रहा थे, उसी दौरान यह विस्फोट हुआ। घायलों में एक सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट हैं, जिनकी हाल ही में यहां तैनाती हुई थी। विस्फोट इतना जोरदार था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर लगभग पांच फुट गङ्ढा हो गया। संयुक्त सुरक्षा बल और राय के पुलिसकर्मी घटनास्थल की ओर कूच कर गए हैं। पिछले 11 महीने से संयुक्त सुरक्षा बल के जवान इस क्षेत्र में तैनात हैं।

Tuesday, May 18, 2010

पीढ़ापाल में नक्सली पर्चा, बाजार में पसरा सन्नाटापीढ़ापाल में नक्सली पर्चा, बाजार में पसरा सन्नाटा

कांकेर । नक्सलियों द्वारा दो दिन बंद के चलते रविवार की रात नक्सलियों का एक समुह नगर से दस किमी.दूर स्थित ग्राम पीढ़ापाल पहुंचे और सोमवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार बंद रहेगा लिखा पर्चा जगह-जगह चिपकाया तथा जिसके चलते आसपास के 24 ग्रामों का बड़ा बाजार पीढ़ापाल में सन्नाटा पसरा रहा। बाजार में इक्का-दुक्का ग्रामीण तो नजर आये लेकिन व्यापारी सिरे से गायब रहे। दिनभर बाजार में दहशत का माहौल था।

दंतेवाडा में नक्सलियों द्वारा बस को उडाने के बाद दहशत व्याप्त

सुकमा ..दंतेवाडा। छत्तीसगढ के दंतेवाडा जिले में सुकमा रोड पर माओवादी नक्सलियों द्वारा कल बारदी सुरंग से विस्फोट कर एक यात्री बस को उडाने के बाद इलाके में दहशत व्याप्त है और बस संचालकों ने नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में बस चलाने से इंकार कर दिया है। इस घटना में 31 यात्री मारे गये थे जिसमें 16 पुलिस कर्मी हैं। कल इस घटना में मृतकों की संख्या 35 बतायी गयी थी । घटना के विरोध में आज दंतेवाडा जिला मुख्यालय में सभी दुकाने बंद हैं।नागरिकों ने एक रैली निकाल कर घटना का विरोध किया।इस बीच नक्सलियों द्वारा दो दिवसीय बंद के दौरान आज पूरे बस्तर संभाग में आवागमन पूरी तरह ठप है तथा बैलाडीला से विशाखापटनम चलने वाली पैंसेंजर ट्रेन को रद्द कर दिया है। पुलिस महानिरीक्षक टीजे लांग कुंमेर ने बताया कि कल दंतेवाडा .सुकमा मार्ग पर ग्राम चिंगावरम के पास हुए एक बारदी सुरंग विस्फोट में 31 लोगों की मौत हो गयी ।जिसमें सीमा सुरक्षा बल का एक जवान ् पुलिस बल के 11 जवानों और 4 विशेष पुलिस अधिकारी तथा 22 नागरिक गंभीर हैं।जिनमें से कुछ का उपचार सुकमा अस्पताल में तथा कुछ लोगों का जगदलपुर मेडिकल कालेज में उपचार किया जा रहा है। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार यात्री बस दंतेवाडा से सुकमा के लिए रवाना हुयी थी । जिसमें दंतेवाडा से कुल चालीस यात्री सवार हुए थे।जिनमें से कुछ नकुलनार ् मैलावाडा में उतर गए। इसके बाद भूसारास से आगे मिचवार के पास जवानों ने बस को रोका और कई जवान बस में सवार हो गये। यह जवान भूसारास इलाके में सर्चिंग के लिए रविवार की शाम रवाना हुये थे और सुकमा के थाना प्रभारी संदीप चंद्यकर के नेतृत्व में कल वापिस लौट रहे थे ।इन्हें सुकमा पहुंचना था।यह जवान ट्रक ्बस और एक जीप में भूसारास से करीब आठ किलो मीटर की दूरी तय करने के बाद जैसे ही वाहनों का काफिला पडवारास के पास पहुंचा तो घात में बैठे नक्सलियों ने बारदी सुरंग विस्फोट को अंजाम दिया ।इससे काफिले के तीसरे नंबर पर चल रही निजी यात्री बस विस्फोट की चपेट में आ गयी और बस के परखच्चे उड गये । विस्फोट में बस में सवार कोया कमांडों के जवान मौके पर ही शहीद हो गए ।वहीं ंबस चालक ् परिचालक सहित दर्जन भर यात्रियों को भी विस्फोट ने मौत की नींद सुला दिया ।जिसमें चार महिला यात्री भी शामिल हैं।तथा दो यात्री गंभीर रप से घायल हो गये। घटना स्थल से 20. 25. मीटर दूर खेत में पडा एक यात्री का शव हादसे की वीभत्सता को प्रदर्शित कर रहा है।उसके दोनों पांव विस्फोट में अलग हो गये।विस्फोट के बाद सडक के बीचों बीच चार. पांच मीटर बडा सा गड्डा हो गया ।घटना स्थल से तीन .चार मीटर दूर इलेक्ट्रिक तार भी बरामद हुए हैं।जिसे देख अंदेशा जताया जा रहा है कि नक्सलियों ने सडक से कुछ किलोमीटर दूर झाडियों से हमले को अंजाम दिया।

नक्सली तो 229 जवानों को उड़ाना चाहते थे, योजना विफल

जगदलपुर ! माना जा रहा है दंतेवाड़ा जिले के चिंगावरम क्षेत्र में नक्सलवादियों ने 229 जवानों को उड़ाने की योजना बना रखी थी। योजना विफल हो गई। नक्सलियों द्वारा किए गए विस्फोट में बस में सवार 33 यात्रियों की मौत हो गई। मृत लोगों में एसपीओ भी शामिल हैं।

16 मई को खुफिया सूचना के आधार पर सुकमा थानेदार संदीप चंद्रा के नेतृत्व में भूसारास, चिंगावरम एवं गादीरास क्षेत्र के जंगलो की सर्चिंग हेतु निकली 125 छ.ग. सशस्त्र बल, 104 कोया कमांडो एवं एसपीओ की टीम 17 मई की शाम 4.30 बजे वापस लौट रही थी। थके-हारे जवानों ने अश्वनी राजकुमार बस क्र. सीजी-17 एसएस 9295 में भूसारास के पास शरण लिया किन्तु यह बस नक्सलियों का निशाना बन गया। सूत्रों का कहना है कि कुल 229 जवान जिसमें एसटीएफ, जिला पुलिस बल, कोया कमांडो एवं एसपीओ थे वे निशाना नहीं बन सके यदि अश्वनी राजकुमार की बस लैंडमाईन्स की चपेट में नहीं आती तो पीछे से आ रही जवानों से भरी वाहन चपेट में आ जाती । गत माह चिंतलनार के ताड़मेटला में घटित हुई नक्सली घटना में 65 वीं बटालियन का पूरी तरह सफाया हो गया। इसी प्रकार कल की घटना में सैकड़ों संयुक्त जवान मारे जाते।
आरक्षक बनने का सपना टूटा
दंतेवाड़ा जिले के गादीरास थाना क्षेत्र के भूसारास के पास लैण्डमाईंस विस्फोट में घायल हुई सुश्री संगीता नाग ने इलाज के दौरान मेडिकल मॉलेज में अपना दम तोड़ दिया।दंतेवाड़ा जिला पुलिस मुख्यालय में आरक्षक हेतु चयनित हुई जिसकी परीक्षा देकर संगीता नाग पिता मंगराम लौट रही थी तभी वह भूसारास के निकट नक्सलियों द्वारा लैण्डमाईंस विस्फोट में घायल हो गई। उपचार के दौरान संगीता ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया जिसके कारण उसकी आरक्षक बनने की चाहत मरहुम हो गई।

काउंसलिंग से लौट रही भावी शिक्षाकर्मी घायल
गादीरास थाना क्षेत्र के भूसारास के पास लैण्डमाईंस विस्फोट में घायल छिन्दगढ़ निवासी देवव्रत की पत्नी बुरी तरह घायल हो गई है। बड़ी जद्दोजहद के बाद उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया। छत्तीसगढ़ निवासी देवव्रत का कहना था कि उनकी पत्नी का शिक्षाकर्मी में चयन हो गया है जिसकी काउंसलिंग कल थी। काउंसलिंग समाप्ति के बाद सुकमा लौट रही थी मगर हम भूसारास के पास इस घटना शिकार हो गए।

राजनीति चश्मे को हटाने की आवश्यकता-लखमा
दंतेवाड़ा कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं कोन्टा विधायक कवासी लखमा का कहना है कि सभी लोगों को विश्वास में लेकर नक्सलियों से लड़ने की ठोस रणनीति बनानी होगी तभी नक्सलियों का सफाया हो जायेगा। श्री लखमा ने फोन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक चश्मे को निकालकर सरकार को एक ठोस रणनीति बनानी चाहिये क्योंकि सरकार की गलत नीति के कारण ही नक्सलियों ने अपना पैठ बनाया।

नक्सली हिंसा: सूत्रधार कौन?

सोमवार की दोपहर बस्तर की धरती एक बार फिर निर्दोष व निहत्थे जनों के खून से लाल हुई। इनकी हत्याएं जिन्होंने की, वे अपने को नक्सलवादी अथवा माओवादी कहते हैं। किंतु ये नक्सलवादी नहीं हैं। ये माओवादी भी नहीं हैं। जहां वाद होगा वहां कोई विचार भी होगा, किंतु बस्तर में दिन प्रतिदिन जिस नृशंस तरीके से और बिना किसी जाहिर कारण के हत्याएं की जा रही हैं इसे किस विचार प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जाए! जैसा कि हम समझ पा रहे हैं ये तथाकथित माओवादी किसी और की लड़ाई लड़ रहे हैं। ये किन्हीं अदृश्य शक्तियों के लिए काम कर रहे भाड़े के सिपाही हैं। मैंने कुछ समय पहले लिखा था कि ये 1967 के नक्सली नहीं हैं और न वे 1948 के तेलंगाना के विद्रोहियों के उत्तराधिकारी हैं। आज ारूरत यह समझने की है कि हत्यारों की यह फौज किसके लिए काम कर रही है और इनका असली मकसद क्या है।

ये जितनी ज्यादा हिंसा फैलाएंगे, उतनी ही आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ेगी। उतना ही चुनी हुई सरकार और प्रशासन पर से विश्वास उठेगा। उतना ही बस्तर को पुलिस के बजाय सेना के हवाले करने का विचार जोर पकड़ेगा। ध्यान रहे कि ऐसी मांग उठी तो आदिवासी की भूमिका मूकदर्शक की ही होगी। आज भी वह कहां कुछ कह पा रहा है! वह तो अपने घर से बेदखल है और विचारों की दुनिया से विस्थापित। उसके हित-अहित के सारे निर्णय, बहुत दूर बैठकर लिए जा रहे हैं। अगर इस माहौल में कोई जनतांत्रिक विमर्श और शांति स्थापना की बात करता है तो उसके लिए जगह लगातार सिकुड़ती जा रही है। कुल मिलाकर ये कथित माओवादी ऐसा वातावरण बना देना चाहते हैं कि विवेक, संयम, सोच जैसे शब्द बेमानी हो जाएं। इससे किसका हित होगा, यह समझना कठिन लेकिन जरूरी है।

ध्यान दीजिए कि आज भारत की आबादी एक अरब से ज्यादा है। यद्यपि न्यायसंगत वितरण व आर्थिक असमानता का लक्ष्य अभी बहुत दूर है, फिर भी पहले के मुकाबले स्थितियां बेहतर दिखाई देती हैं। आजादी के समय 33 करोड़ आबादी थी। आज लगभग उतनी ही बड़ी संख्या उन भारतीयों की है जो विश्व बाजार में उपभोक्ता के रूप में गिने जा रहे हैं। एक तरफ इनके लिए मायाजाल बिछाया जा रहा है तो दूसरी तरफ विश्व में बढ़ते उपभोग के कारण तीसरी दुनिया के नैसर्गिक संसाधनों पर बहुराष्ट्रीय घरानों की गिध्द दृष्टि लगी हुई है। यह मात्र संयोग नहीं है कि जिन इलाकों में नक्सलियों ने अपने पैर जमाए हैं, वहीं ये सारे संसाधन हैं।

इन दस-बीस सालों में नक्सलियों या माओवादियों ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जिससे नैसर्गिक संसाधनों पर मूल निवासियों का प्रथम दावा पुख्ता हुआ हो। ऐसे में यही समझ आता है कि बस्तर हो या कोई अन्य अंचल, ये हत्यारे दस्ते राष्ट्रीय अथवा अन्तरराष्ट्रीय कॉरपोरेट घरानों के इशारों पर ही काम कर रहे हैं। कहना होगा कि देश के कुछ राजनैतिक दलों में भी ऐसे लोग हैं जो उनके ही इंगित पर चल रहे हैं। दूसरे शब्दों में बैलेट हो या बुलेट-सारा खेल परदे के पीछे से संचालित हो रहा है और सूत्रधार दिखाई नहीं देता। इसीलिए हिंसक दुर्घटनाओं की जितनी भी निंदा या भर्त्सना की जाए, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता।

इस दुष्चक्र से बाहर निकलने का एक ही उपाय है कि केंद्र व प्रदेशों की चुनी हुई सरकारों की विश्वसनीयता जनता के बीच कायम हो। इसके लिए उन्हें तात्कालिक राजनैतिक लाभ का मोह छोड़कर व्यापक जनहित की नीतियों पर पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा। यदि जनता का भरोसा आप पर है तो वह खुद इन भाड़े के सिपाहियों का सामना कर लेगी। जिस जनता ने अंग्रेजी राज खत्म किया, वह इस देश की ही जनता तो थी।
ललित सुरजन
प्रधान संपादक, देशबंधु

मानवता के दुश्मनों को मसलने का सही वक्त

राज हिन्दुस्तानी
सोमवार को नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले में रणनीति बदलकर निहत्थे और निर्दोष ग्रामीणों का भी खून बहाया। बारूदी विस्फोट करके उन्होंने एक यात्री बस उड़ा दी। अभी तक नक्सली यह कहते रहे कि वे वनवासियों के हिमायती हैं, उनके हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन इस घटना के बाद यह साबित हो गया कि नक्सली उन वनवासियों के कतई सगे नहीं हैं,जिनके नाम पर वे सरकार से हिंसक लड़ाई लड़ रहे हैं। कुछ दिनों पहले नक्सलियों ने जनगणना का विरोध करते हुए ११ सूत्री माँग-पत्र जारी किया था, जिसमें कई ऐसी बातें थीं, जिन्हें पढ़कर लगा कि नक्सली वनवासियों के चिंतक हो सकते हैं।


उनके माँग-पत्र में सभी को रोजगार और राशन कार्ड देने की बात थी। उन्होंने हर पंचायत में अस्पताल खोले जाने और दवा वितरण पर जोर दिया था। स्थापित आश्रमों को फिर से ग्रामों में संचालित करने और हर पंचायत में पहली से आठवीं तक आश्रम स्कूल खोलने का मुद्दा उठाया था। इन माँगों को सरकार के साथ मिल-बैठकर भी पूरा कराया जा सकता है। इसके लिए निर्दोषों का लहू बहाने की कोई जरूरत नहीं। सरकार खुद भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ चलाकर वनवासियों की जरूरतें पूरी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह बराबर यह प्रयास करते रहे हैं कि नक्सली समर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएँ और बेहतर जिंदगी की शुरुआत करें। केंद्र सरकार भी नक्सलियों के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाए हुए है कि शायद वे देर-सबेर सुधरें, लेकिन जिस तरह की लड़ाई नक्सली अब लड़ रहे हैं, उससे तो सरकार को अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए मुँहतोड़ जवाब देना ही होगा। बहुत हो चुका नक्सलियों को समझाना, मुख्यधारा में लौटने का आग्रह करना, बातचीत के लिए रास्ता खुला रखना, बैठक, बयानबाजी, निंदा, आक्रोश, शांतियात्रा। अब तो वही कार्रवाई जायज होगी, जिससे नक्सलियों का सफाया हो सके। उनके प्रति तनिक भी नरमी छत्तीसगढ़ के विकास के लिए घातक होगी। कथित मानवाधिकारवादियों के विरोध की परवाह न करते हुए हर वह कदम उठाया जाए, जिससे पैशाचिक प्रवृत्ति वाले नक्सली छत्तीसगढ़ की पावन माटी को अब और खून से न रंगने पाएँ। बहुत खेल चुके वे खून की होली, अब उन्हें यह जता देना है कि सरकार किसी मामले में कमजोर नहीं है। वह तो संभलने व सुधरने का मौका दे रही थी।


अब तो चाहे नक्सलियों के खात्मे के लिए वायुसेना का सहारा लेना पड़े या मौजूदा पुलिस बल बढ़ाना पड़े, कुछ भी करना पड़े, लेकिन मानवता के इन विरोधियों को समूल मिटाना होगा। जो लोग देश को आंतरिक रूप से कमजोर करने की कोशिश में लगे हुए हैं, उनके फन को कुचलना समय की माँग है। राज्य में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव से बौखलाए नक्सलियों को ठिकाने लगाने का यही सही वक्त है। वरना वे बौखलाहट में आम जनता को और भी अधिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। वनवासी भी यह समझें कि नक्सली उनके कितने शुभचिंतक हो सकते हैं। गाँव के लोग एकजुट होकर नक्सलियों का विरोध करें, वे डरे नहीं कि नक्सली उन पर हमला करेंगे। यह डर और पनाह देने का ही दुष्परिणाम है कि नक्सली आज समूचे छत्तीसगढ़ में अपने पैर जमाकर राज्य के विकास के लिए घातक बने हुए हैं।